अमेरिका: अमेरिकी सरकार ने मई में 22 अरब डॉलर का टैक्स रिफंड किया है।
यह भारी-भरकम रकम डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ आदेश के बाद वसूले गए उन आयात शुल्कों का हिस्सा है, जिन्हें हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बताकर खारिज कर दिया था।
कोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद हुई यह पहली रकम वापसी है, जिसने कारोबारियों को बड़ी राहत दी है।
अमेरिकी खजाना विभाग (ट्रेजरी डिपार्टमेंट) ने मई महीने में कस्टम रिफंड के तौर पर 22 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम वापस कर दी है।
यह पैसा उन आयात शुल्कों (टैरिफ) का हिस्सा है, जिसे ट्रंप ने दुनिया भर के व्यापारिक भागीदारों पर लगाया गया था।
हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के इन ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था, जिसके बाद यह रिफंड प्रक्रिया शुरू हुई है।
पैसा वापस मिलना शुरू तो हो गया है, लेकिन कारोबारियों की राह अभी पूरी तरह से आसान नहीं हुई है।ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड कोर्ट के इस रिफंड आदेश के खिलाफ अपील कर दी है।
इस कदम से चल रही भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। मामले की सुनवाई कर रहे यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने इस पर सख्त रुख अपनाया है।
उन्होंने पिछले हफ्ते एक पत्र के जरिए चेतावनी दी है कि इस न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की दखलअंदाजी से रिफंड के काम में हो रही प्रगति धीमी पड़ सकती है।
इसका मतलब है कि अपना पूरा पैसा वापस पाने के लिए आयातकों को अभी कुछ और कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी ट्रंप प्रशासन ने हार नही माना और आयात पर 10 प्रतिशत का नया कर लगाया है और मिली जानकारी के हिसाब से अमेरिका भविष्य में कुछ स्थाई टैक्स लगाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।












