गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र स्थित बसगना गांव में त्रिपुरारी राय और उनके भाई कृष्ण मुरारी राय प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। दोनों भाई करीब 25 एकड़ भूमि में पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती कर रहे हैं। खेत में 1000 आम, 900 अमरूद, लीची, एप्पल बेर समेत कई फलदार पौधे लगाए गए हैं, जो अब उत्पादन भी दे रहे हैं।

खेती में रासायनिक खादों के बजाय एडवांस जीवामृत डाइजेस्ट बैग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस माध्यम से प्रतिदिन लगभग 700 लीटर जैविक तरल खाद तैयार की जाती है, जो पेड़-पौधों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है।

त्रिपुरारी राय ने बताया कि गोबर, गोमूत्र, गुड़, मट्ठा और खराब फल-सब्जियों से जैविक खाद तैयार की जाती है। वहीं गौ कृपा अमृतम का उपयोग खाद और प्राकृतिक कीटनाशक दोनों रूपों में किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आने वाले समय में बीज उत्पादन भी स्वयं करने की योजना है। वहीं शास्त्री नगर निवासी सेवानिवृत्त कर्मचारी ललन देव ने कहा कि उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरारी राय को प्रेरित किया था और आज इसका सकारात्मक परिणाम सामने है। यह मॉडल क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।












