गिरिडीह पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता मिली है। भाकपा माओवादी संगठन की एरिया कमेटी सदस्य और 15 नक्सली मामलों में वांछित अनिता किस्कू ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पण के बाद सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उसे आर्थिक सहायता के साथ अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी। आइए देखते हैं यह रिपोर्ट।गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि भाकपा माओवादी संगठन की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने आत्मसमर्पण कर दिया है। अनिता लंबे समय से पारसनाथ जोन, लुगू पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय थी। उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में कुल 15 मामले दर्ज हैं, जिनमें यूएपीए, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सीएलए एक्ट के तहत केस शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार अनिता वर्ष 2009 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। संगठन में रहते हुए वह हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटकों को छिपाने, लेवी वसूली और अन्य गतिविधियों में शामिल रही। एसपी ने बताया कि संगठन के अंदर कथित शोषण, पुलिस की लगातार कार्रवाई और उसके पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसका मनोबल टूट गया, जिसके बाद उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।एसपी ने बताया कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति “नई दिशा-एक नई पहल” के तहत अनिता किस्कू को कुल 3 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसमें से 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान कर दी गई है, जबकि शेष राशि नियमानुसार दी जाएगी। इसके अलावा सरकार उसके रहने, खाने, सुरक्षा, पुनर्वास और न्यायालय में चल रहे मामलों से संबंधित खर्च का भी वहन करेगी।

वहीं आत्मसमर्पण के बाद अनिता किस्कू ने नक्सलवाद को गलत रास्ता बताते हुए संगठन में सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उसने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है और हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है।गिरिडीह पुलिस का मानना है कि अनिता किस्कू के आत्मसमर्पण से नक्सल विरोधी अभियान को मजबूती मिलेगी और जंगलों में सक्रिय अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।











