
गिरिडीह में विकास के तमाम दावों के बीच, कुछ गांवों की तस्वीरें सिस्टम की असलियत को उजागर कर रही हैं। पीरटांड़ के डहिया और दलुआडीह जैसे गांवों में न तो पक्की सड़कें हैं और न ही चार पहिया वाहनों के लिए उचित रास्ते। इस वजह से ग्रामीणों को न केवल दैनिक जीवन में परेशानी होती है, बल्कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को खाट पर टांग कर इलाज के लिए ले जाना पड़ता है। हाल ही में डहिया गांव में मनीषा नामक आदिवासी महिला को गंभीर चोट आई, और उसे इलाज के लिए खाट पर लेकर लोग दो नदियां पार कर पक्के मार्ग तक पहुंचे, लेकिन फिर भी इलाज की महंगी लागत ने उनके सपने तोड़ दिए।

यह स्थिति दर्शाती है कि गिरिडीह के आदिवासी इलाकों में न केवल सड़क और चिकित्सा सुविधाओं की कमी है, बल्कि गरीबी के कारण इलाज भी महंगा हो जाता है। यह मामला केवल एक उदाहरण है, ऐसे कई अन्य मामलों ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। गिरिडीह में आदिवासियों की स्थिति कभी नहीं सुधरी, और सिस्टम की उपेक्षा ने उनकी जिंदगी को और भी कठिन बना दिया है।












