गिरिडीह। झारखंड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एम्प्लॉइज फेडरेशन (JHAROTEF) के आह्वान पर रविवार को पूरे राज्य के साथ-साथ गिरिडीह जिले में भी “MACP अधिकार प्रतिवाद दिवस” मनाया गया। जिले के सभी प्रखंडों के प्राथमिक, मध्य, उच्च एवं उच्चतर विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षिकाओं, अधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर शिक्षा विभाग के उस आदेश का विरोध किया, जिसमें शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की तरह MACP (Modified Assured Career Progression) का लाभ नहीं दिए जाने का प्रावधान किया गया है।कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हुए विभागीय आदेश की प्रतीकात्मक प्रति जलाकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। प्रदर्शनकारियों ने “एक ही मांग, एक ही नारा – शिक्षकों को मिले MACP हमारा” जैसे नारों के साथ अपनी मांग को बुलंद किया।
महासंघ ने कहा कि सत्तारूढ़ दल ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की भांति MACP का लाभ देने का वादा किया था। साथ ही विधानसभा में भी सरकार की ओर से इस विषय पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश इन वादों और आश्वासनों के विपरीत है, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।
JHAROTEF के प्रांतीय उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सरकार के सार्वजनिक आश्वासनों और विभागीय निर्णयों में इस प्रकार का विरोधाभास लाखों शिक्षकों एवं कर्मचारियों के विश्वास को आहत करता है। वहीं जिला अध्यक्ष मुन्ना प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि शिक्षकों को MACP से वंचित रखने का निर्णय न तो न्यायसंगत है और न ही संवैधानिक समानता की भावना के अनुरूप। उन्होंने सरकार से तत्काल विभागीय आदेश वापस लेकर शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों के समान MACP का लाभ देने की मांग की।प्रांतीय महिला सचिव शमा परवीन ने कहा कि राज्यव्यापी प्रतिवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक और कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर अपने संघर्ष को अंतिम मुकाम तक पहुंचाएगा।
महासंघ ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी जिला, प्रखंड एवं विद्यालय स्तर के पदाधिकारियों, शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही सरकार से शिक्षा विभाग का आदेश तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो पूर्व घोषित चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा “पाने अपना अधिकार, चलो मुख्यमंत्री के द्वार” अभियान के तहत राज्य के हजारों शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी मुख्यमंत्री आवास तक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक कूच करेंगे।












