अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारत की महिलाओं की उपलब्धियों, उनके साहस, समर्पण और परिवर्तनकारी शक्ति को सम्मान देने का अवसर है। हमारी महिलाएँ आज घर-परिवार से लेकर शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, सुरक्षा बलों और खेल के मैदान तक हर क्षेत्र में नेतृत्व का नया अध्याय लिख रही हैं। उच्च शिक्षा और STEM क्षेत्रों में उनकी बढ़ती भागीदारी, रक्षा सेवाओं में उनकी सक्रिय भूमिका और पंचायती राज संस्थाओं में उनका मजबूत प्रतिनिधित्व यह साबित करता है कि भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका केंद्र में है।
इतिहास भी भारतीय नारी की शक्ति का साक्षी रहा है। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, सावित्रीबाई फुले का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान और अहिल्याबाई होलकर का जनकल्याणकारी शासन आज भी समाज को प्रेरित करता है। आज इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “महिला-नेतृत्व वाला विकास” देश की नीतियों का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों ग्रामीण महिलाएँ स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं और आर्थिक स्वतंत्रता की नई कहानी लिख रही हैं।
महिलाओं के अदृश्य योगदान, विशेषकर ‘केयर इकोनॉमी’ यानी देखभाल की अर्थव्यवस्था, को भी अब नई पहचान मिल रही है। परिवार और समाज की देखभाल में महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक औपचारिक आर्थिक गणना से बाहर रही, लेकिन अब इसे विकास के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने केयर इकोनॉमी को मजबूत करने, देखभाल सेवाओं को पेशेवर रूप देने और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया है।
भारत में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर 2017–18 के 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023–24 में 41.7 प्रतिशत हो गई है, जो महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाओं और आर्थिक भागीदारी का संकेत है। केंद्रीय बजट 2026–27 में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऐतिहासिक जेंडर बजट के माध्यम से महिलाओं के नेतृत्व में विकास को और गति देने का प्रयास किया गया है। इसके तहत देखभाल सेवाओं के लिए 1.5 लाख कार्यकर्ताओं के कौशल विकास, कामकाजी महिला छात्रावासों का विस्तार और आंगनवाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
तेजी से बदलते सामाजिक ढांचे—शहरीकरण, प्रवासन और एकल परिवारों के बढ़ते चलन—के बीच गुणवत्तापूर्ण बाल देखभाल और पारिवारिक सेवाओं की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। ऐसे में केयर इकोनॉमी में निवेश न केवल महिला रोजगार को बढ़ावा देता है, बल्कि बच्चों के विकास, बुजुर्गों के कल्याण और समग्र आर्थिक प्रगति को भी सुनिश्चित करता है।
जैसे-जैसे भारत ‘अमृतकाल’ से ‘विकसित भारत @2047’ की ओर बढ़ रहा है, यह स्पष्ट है कि महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण के बिना विकास की कल्पना अधूरी है। इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हमें महिलाओं के अदृश्य श्रम को सम्मान देने और उनके लिए अधिक अवसर, गरिमा और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने का संकल्प लेना चाहिए।
— अन्नपूर्णा देवी,
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार।











