गिरिडीह जिले के रॉकी नवल पिछले 17 वर्षों से बिना किसी लाभ या सरकारी सहायता के खतरनाक सांपों का रेस्क्यू कर जैव विविधता की रक्षा कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पुलिस लाइन में बेबी कोबरा का सफल रेस्क्यू कर पुलिसकर्मियों को राहत पहुंचाई, लेकिन अफसोस की बात है कि आज भी उनके पास जरूरी उपकरण, सुरक्षा संसाधन या कोई आधिकारिक मान्यता नहीं है।
रॉकी नवल गिरिडीह के एकमात्र ऐसे स्वयंसेवी हैं जो बिना शुल्क के खतरनाक सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ते हैं। वे न केवल वन्यजीवों की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि समाज को जागरूक भी कर रहे हैं कि सांपों को मारा न जाए। उनकी निःस्वार्थ सेवा के बावजूद उन्हें न तो प्रशासनिक समर्थन मिला है और न ही कोई प्रोत्साहन। अब समय है कि प्रशासन और वन विभाग रॉकी जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं को संसाधन, प्रशिक्षण और पहचान देकर उनके योगदान को सम्मानित करें।












