गिरिडीह: चंडीगढ़ के प्रसिद्ध रॉक गार्डन की तर्ज पर अब गिरिडीह में भी स्क्रैप (कबाड़) से तैयार होने वाला एक अनोखा थीम पार्क विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत उपनगरी पचंबा स्थित कल्याणडीह वन नगर के 28 एकड़ क्षेत्र में स्क्रैप रॉक गार्डन का निर्माण किया जाएगा।शनिवार को झारखंड सरकार के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू तथा गिरिडीह नगर निगम की महापौर प्रमिला मेहरा ने संयुक्त रूप से भूमि पूजन कर योजना की आधारशिला रखी।
समारोह में पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार, पूर्वी वन प्रमंडल के वन संरक्षक सह वन प्रमंडल पदाधिकारी मनीष तिवारी, पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी अंकित कुमार सिंह, नगर आयुक्त विजय सिंह बिरुआ, सहायक वन संरक्षक संजीव कुमार रवि, अनिल कुमार, तेलोडीह के मुखिया मो. शब्बीर आलम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने संबोधन में कहा कि वन का वास्तविक स्वामी आम जनता है, जबकि वन विभाग उसकी सुरक्षा और संरक्षण का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जंगलों और पर्यावरण की रक्षा जनभागीदारी से ही संभव है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है और उसी कड़ी में गिरिडीह को चंडीगढ़ की तर्ज पर स्क्रैप रॉक गार्डन की सौगात मिली है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।उन्होंने कहा कि पार्क में बेकार पड़े स्क्रैप और कबाड़ से आकर्षक मूर्तियां, कलाकृतियां और विभिन्न संरचनाएं तैयार की जाएंगी। इसके अलावा शहर के अन्य पार्कों में भी स्क्रैप से बनी कलाकृतियां स्थापित की जाएंगी। इससे एक ओर कबाड़ का बेहतर उपयोग होगा तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी।
पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी मनीष तिवारी ने बताया कि चंडीगढ़ का रॉक गार्डन रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां घरेलू, शहरी और औद्योगिक कचरे से मानव, पशु और काल्पनिक आकृतियों की कलाकृतियां तैयार की गई हैं।गिरिडीह में भी उसी अवधारणा पर आधारित थीम पार्क विकसित किया जाएगा, जिसमें स्क्रैप से बनी कलाकृतियों के साथ झरने, पूल, घुमावदार पथ और आकर्षक प्राकृतिक संरचनाएं बनाई जाएंगी। यह पार्क पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और कबाड़ के पुनः उपयोग का भी प्रेरणास्रोत बनेगा।











