इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रहे कैश कांड मामले में अब संसद की ओर से बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 146 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेता शामिल हैं। कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बीबी आचार्य को शामिल किया गया है। रिपोर्ट आने तक यह प्रस्ताव लंबित रहेगा।
मामला तब सामने आया जब इस साल 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगी और दमकल टीम को वहां 500-500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल मिले, जो बोरे में भरे हुए थे। यह घटना उस समय की है जब वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में पदस्थ थे। मामले ने तूल पकड़ा और 28 मार्च को उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया। जस्टिस वर्मा का कहना है कि उनके खिलाफ यह सब एक साजिश है और उनके घर में कोई नकदी नहीं थी।
महाभियोग की प्रक्रिया के तहत किसी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है। सबसे पहले यह प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति या लोकसभा स्पीकर के पास जाता है, फिर जांच कमेटी बनाई जाती है जिसमें सुप्रीम कोर्ट का एक जज, हाईकोर्ट का एक चीफ जस्टिस और एक विधि विशेषज्ञ शामिल होते हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होती है, और यदि संसद में प्रस्ताव पारित हो जाता है तो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जज को पद से हटा दिया जाता है।












