गिरिडीह चैती छठ पूजा के दूसरे दिन, जिसे खरना कहा जाता है, व्रतियों के लिए विशेष महत्व रखता है। 2 अप्रैल 2025, बुधवार को इस पावन अनुष्ठान के तहत व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखते हैं और संध्या के समय सूर्य देव की पूजा के बाद गुड़ की खीर, रोटी और फल का सेवन करते हैं।
इसके साथ ही उनका 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास आरंभ होता है। इस दिन गंगाजल से सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है, और प्रसाद ग्रहण कर भक्त अपनी आस्था को और दृढ़ करते हैं।












