गिरिडीह के करगाली गांव में पांच साल की मासूम प्रतिमा कुमारी की इलाज के अभाव में मौत हो गई। पिता अनिल सिंह और माँ करिश्मा आर्थिक तंगी के कारण इलाज नहीं करवा सके, जबकि गांव का स्वास्थ्य केंद्र बंद था क्योंकि डॉक्टर सरकारी टारगेट पूरा करने दूसरे गांव गए हुए थे। बेटी को खोने के गम में पिता भी बीमार पड़ गए, लेकिन कोई प्रशासनिक मदद समय पर नहीं पहुंची।
प्रतिमा की मौत के बाद नेताओं और अधिकारियों का कारवां सांत्वना देने पहुंचा, कोई 1000 रुपये लेकर आया तो कोई 25 किलो चावल, लेकिन जब ज़रूरत थी, तब कोई आगे नहीं आया। बेशर्मी की हद तो तब हुई जब धनवार BDO आनन-फानन में ऑनलाइन राशन कार्ड और पीएम आवास योजना की प्रक्रिया पूरी कराने लगे। सवाल उठता है कि क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही चलेंगी? कब तक गरीब परिवारों की बदनसीबी राजनीति की भेंट चढ़ती रहेगी?












