ऑपरेशन सिंदूर पर चुप्पी साधने वाले अभिनेताओं के बारे में विवादास्पद टिप्पणी करने वाली लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। जस्टिस राजा बसु ने उन्हें जमानत दी है। साथ ही, शर्मिष्ठा पर कई तरह की शर्तें भी लगाई गई हैं, जिन्हें वह मानने के लिए बाध्य रहेंगी।
वहीं, शर्मिष्ठा के वकील डीपी सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कोर्ट ने माना है कि यह संज्ञेय अपराध नहीं है। इसके अलावा, गिरफ्तारी का आधार जाहिर नहीं हो पा रहा है। इस मामले में धमकी का एंगल भी सामने आ रहा था। शर्मिष्ठा ने खुद न्यायालय में कहा कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, लिहाजा उन्हें सुरक्षा दी जाए।
उन्होंने कहा कि इन्हीं सब पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने तय किया कि जमानत दी जा सकती है। शर्मिष्ठा को अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा। उनके विदेश जाने पर पाबंदी लगाई गई है।
साथ ही, शर्मिष्ठा पनोली के पिता ने अपनी बेटी की मिली जमानत पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि मेरी बेटी बाहर आ रही हैं। अभी जो कार्रवाई शेष रह गई है, उसे पूरा करना होगा। इसके बाद मेरी बेटी बाहर आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि कोर्ट की तरफ से अभी मेरी बेटी पर कई तरह की पाबंदी लगाई गई है। साथ ही, 10 हजार रुपये का निजी मुचलका देने का भी आदेश दिया गया है। कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि अगर मेरी बेटी बाहर जाती है, तो उसे इसके लिए कोर्ट से आदेश लेना होगा और कोर्ट की तरफ से इस मामले में जब भी उसे बुलाया जाएगा, तो उसे हाजिर होना होगा।
कोर्ट ने बंगाल पुलिस को शर्मिष्ठा की सुरक्षा बढ़ाने का भी आदेश दिया है, क्योंकि शर्मिष्ठा ने दावा किया है कि उनकी टिप्पणी के बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
कोर्ट ने कहा कि मान लिया कि इस देश में सभी लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी मिली हुई है, तो वे खुलकर अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं हो जाता है कि उनके मन में जो आएगा, वे बोलते रहेंगे। हर चीज की अपनी एक मर्यादा होती है। सजा सात साल से कम है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस को गिरफ्तारी करने का कोई हक नहीं है। भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 35 के तहत सभी पुलिस को गिरफ्तारी का पूरा अधिकार दिया गया है। हमारे देश में हर समुदाय, धर्म और संप्रदाय के लोग रहते हैं। ऐसी स्थिति में सभी को अपनी बात रखने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। इसके बाद ही कुछ कहना चाहिए। कुछ भी बोलने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसका क्या परिणाम निकलकर सामने आएगा।
बता दें कि शर्मिष्ठा पनोली पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर ऑपरेशन सिंदूर पर चुप्पी साधने वाले अभिनेताओं के बारे में विवादित टिप्पणी की थी। ऐसा करके उन्होंने एक धर्म विशेष के लोगों की भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया था। इसी के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस ने 30 मई को गुरुग्राम से उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। लेकिन, अब उन्हें कोलकाता हाईकोर्ट की तरफ से अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
–आईएएनएस
एसएचके/जीकेटी
इन शर्तों पर शर्मिष्ठा पनोली को मिली अंतरिम जमानत, पिता ने जताई खुशी
ऑपरेशन सिंदूर पर चुप्पी साधने वाले अभिनेताओं के बारे में विवादास्पद टिप्पणी करने वाली लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। जस्टिस राजा बसु ने उन्हें जमानत दी है। साथ ही, शर्मिष्ठा पर कई तरह की शर्तें भी लगाई गई हैं, जिन्हें वह मानने के लिए बाध्य रहेंगी।
वहीं, शर्मिष्ठा के वकील डीपी सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कोर्ट ने माना है कि यह संज्ञेय अपराध नहीं है। इसके अलावा, गिरफ्तारी का आधार जाहिर नहीं हो पा रहा है। इस मामले में धमकी का एंगल भी सामने आ रहा था। शर्मिष्ठा ने खुद न्यायालय में कहा कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, लिहाजा उन्हें सुरक्षा दी जाए।
उन्होंने कहा कि इन्हीं सब पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने तय किया कि जमानत दी जा सकती है। शर्मिष्ठा को अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा। उनके विदेश जाने पर पाबंदी लगाई गई है।
साथ ही, शर्मिष्ठा पनोली के पिता ने अपनी बेटी की मिली जमानत पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि मेरी बेटी बाहर आ रही हैं। अभी जो कार्रवाई शेष रह गई है, उसे पूरा करना होगा। इसके बाद मेरी बेटी बाहर आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि कोर्ट की तरफ से अभी मेरी बेटी पर कई तरह की पाबंदी लगाई गई है। साथ ही, 10 हजार रुपये का निजी मुचलका देने का भी आदेश दिया गया है। कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि अगर मेरी बेटी बाहर जाती है, तो उसे इसके लिए कोर्ट से आदेश लेना होगा और कोर्ट की तरफ से इस मामले में जब भी उसे बुलाया जाएगा, तो उसे हाजिर होना होगा।
कोर्ट ने बंगाल पुलिस को शर्मिष्ठा की सुरक्षा बढ़ाने का भी आदेश दिया है, क्योंकि शर्मिष्ठा ने दावा किया है कि उनकी टिप्पणी के बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
कोर्ट ने कहा कि मान लिया कि इस देश में सभी लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी मिली हुई है, तो वे खुलकर अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं हो जाता है कि उनके मन में जो आएगा, वे बोलते रहेंगे। हर चीज की अपनी एक मर्यादा होती है। सजा सात साल से कम है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस को गिरफ्तारी करने का कोई हक नहीं है। भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 35 के तहत सभी पुलिस को गिरफ्तारी का पूरा अधिकार दिया गया है। हमारे देश में हर समुदाय, धर्म और संप्रदाय के लोग रहते हैं। ऐसी स्थिति में सभी को अपनी बात रखने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। इसके बाद ही कुछ कहना चाहिए। कुछ भी बोलने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसका क्या परिणाम निकलकर सामने आएगा।
बता दें कि शर्मिष्ठा पनोली पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर ऑपरेशन सिंदूर पर चुप्पी साधने वाले अभिनेताओं के बारे में विवादित टिप्पणी की थी। ऐसा करके उन्होंने एक धर्म विशेष के लोगों की भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया था। इसी के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस ने 30 मई को गुरुग्राम से उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। लेकिन, अब उन्हें कोलकाता हाईकोर्ट की तरफ से अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
–आईएएनएस
एसएचके/जीकेटी
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