गिरिडीह जिले सहित राज्य के कई क्षेत्रों से लगातार जंगलों में आग लगने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे वन संपदा और वन्य जीवों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। जंगलों में लगी आग को बुझाना बेहद कठिन होता है, क्योंकि कई स्थान ऐसे होते हैं जहां न तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच पाती हैं और न ही लोग आसानी से आग तक पहुंच पाते हैं। परिणामस्वरूप आग लंबे समय तक जलती रहती है और पेड़-पौधों के साथ छोटे जीव-जंतुओं का भी जीवन खतरे में पड़ जाता है।

जानकारी के अनुसार जंगलों में आग लगने के मुख्य कारण मानव लापरवाही मानी जा रही है। बीड़ी या सिगरेट पीकर बिना बुझाए फेंक देना तथा महुआ चुनने के लिए पेड़ों के नीचे आग लगाना इसके प्रमुख कारण हैं। लोगों से अपील की गई है कि महुआ संग्रह के दौरान आग लगाने से बचें और पत्तों को एक जगह इकट्ठा करने जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं। बढ़ती गर्मी और संभावित लू को देखते हुए नागरिकों से आग्रह किया गया है कि कहीं भी आग दिखने पर तुरंत उसे बुझाने का प्रयास करें तथा फायर ब्रिगेड या वन विभाग को तत्काल सूचना दें।












