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रेल यात्रियों को झटका: मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया बढ़ा

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने करोड़ों रेल यात्रियों को प्रभावित करने वाला अहम फैसला लेते हुए मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के किराए में मामूली बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। यह नया किराया ढांचा 26 जनवरी से लागू होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह बढ़ोतरी बहुत सीमित और दूरी आधारित रखी गई है, ताकि आम यात्रियों पर अधिक बोझ न पड़े। हालांकि, लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अब पहले की तुलना में थोड़ा अधिक भुगतान करना होगा। खासकर पटना से दिल्ली जैसे रूट पर यात्रा करने वालों के लिए किराए में लगभग 20 रुपये तक की वृद्धि होगी, जो एसी और नॉन-एसी दोनों श्रेणियों में लागू होगी।

रेलवे द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, साधारण श्रेणी (जनरल कोच) में 215 किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त राशि नहीं देनी होगी। लेकिन यदि दूरी 215 किलोमीटर से अधिक है, तो सामान्य श्रेणी में प्रति किलोमीटर 1 पैसे की दर से किराया बढ़ाया गया है। वहीं, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के नॉन-एसी कोच में प्रति किलोमीटर 2 पैसे और एसी कोच में भी प्रति किलोमीटर 2 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। रेलवे का कहना है कि 500 किलोमीटर की नॉन-एसी यात्रा पर यात्रियों को केवल 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे, जिससे यह साफ है कि किराया वृद्धि बेहद सीमित रखी गई है।

यदि दूरी के हिसाब से देखा जाए तो पटना से दिल्ली के बीच लगभग 1,000 किलोमीटर का सफर होता है। ऐसे में नए किराया ढांचे के तहत एसी और नॉन-एसी दोनों श्रेणियों में यात्रियों को करीब 20 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपनगरीय सेवाओं और मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। साथ ही, 215 किलोमीटर तक की साधारण श्रेणी की यात्रा पूरी तरह किराया वृद्धि से मुक्त रहेगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों और निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस सीमित किराया युक्तिकरण से चालू वित्त वर्ष में रेलवे को लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक दशक में रेलवे नेटवर्क, ट्रेनों की संख्या और परिचालन में बड़ा विस्तार हुआ है। इसके साथ ही सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और बेहतर संचालन के लिए मानव संसाधन में भी भारी निवेश किया गया है। वर्तमान में रेलवे की मैनपावर लागत बढ़कर 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि पेंशन पर होने वाला खर्च लगभग 60 हजार करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2024-25 में रेलवे की कुल परिचालन लागत 2 लाख 63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इन बढ़ती लागतों को संतुलित करने के लिए रेलवे ने माल ढुलाई बढ़ाने और यात्री किराए में सीमित युक्तिकरण का रास्ता अपनाया है। रेलवे का दावा है कि सुरक्षा और बेहतर परिचालन के कारण भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माल ढुलाई करने वाला रेलवे बन चुका है और हालिया त्योहारों के मौसम में 12 हजार से अधिक स्पेशल ट्रेनों का सफल संचालन इसका उदाहरण है।

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