अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त आर्थिक कदम का ऐलान किया है। इस बार निशाना बना है फर्नीचर सेक्टर। ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव रखा है कि आने वाले 50 दिनों में जांच पूरी कर अमेरिका में आयात होने वाले फर्नीचर पर नया टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि यह कदम अमेरिकी उद्योग को मजबूती देगा और विदेशी उत्पादन पर निर्भरता कम करेगा। उनका सीधा संदेश है—अब विदेशी कंपनियां मजबूर होंगी कि वे अमेरिका में ही उत्पादन करें। इस घोषणा के तुरंत बाद अमेरिकी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया। Wayfair और Williams-Sonoma जैसी कंपनियों के शेयर गिरे, जबकि घरेलू उत्पादन करने वाली La-Z-Boy जैसी कंपनियों के शेयरों में उछाल आया।
दरअसल, नॉर्थ कैरोलाइना, साउथ कैरोलाइना और मिशिगन जैसे राज्य कभी फर्नीचर उद्योग के बड़े केंद्र माने जाते थे। लेकिन सस्ते श्रम और कम उत्पादन लागत के कारण कंपनियां धीरे-धीरे विदेशों का रुख करने लगीं। परिणामस्वरूप 1979 में जहाँ इस उद्योग में 12 लाख लोग काम करते थे, वहीं 2023 तक यह संख्या घटकर केवल 3.4 लाख रह गई। ट्रंप का तर्क है कि अगर टैरिफ लागू होता है तो न केवल अमेरिकी कंपनियां दोबारा मजबूत होंगी बल्कि हजारों रोजगार भी वापस लौटेंगे। इस कदम को लेकर अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट, 1962 की धारा 232 के तहत जांच शुरू कर दी है।
अब बड़ा सवाल है—क्या इसका असर भारत पर भी होगा? दरअसल, भारत अमेरिका को फर्नीचर का बड़ा निर्यातक है। ऐसे में अगर टैरिफ लागू होता है तो भारतीय फर्नीचर कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार महंगा और मुश्किल साबित होगा। ट्रंप की यह रणनीति सिर्फ फर्नीचर तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉपर, सेमीकंडक्टर और फार्मा जैसे सेक्टर भी इसके दायरे में आ सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी घरेलू उत्पादन और रोजगार को तो फायदा देगा, लेकिन भारत जैसे देशों की निर्यात अर्थव्यवस्था पर दबाव भी डालेगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप की नीति भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को किस दिशा में मोड़ती है।












