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झारखंड सरकार की नई शराब नीति लागू होने को तैयार — जानिए कौन से जिले में कितनी दुकानें रहेंगी और कितनी बंद होंगी!

झारखंड में 1 सितंबर से कुछ बड़ा बदलने जा रहा है… और यह बदलाव सीधे तौर पर जुड़ा है शराब से, रोजगार से, और सरकारी राजस्व से। क्या आपकी गली की शराब दुकान बंद होने जा रही है? क्या अगली बार जब आप ठेके पर जाएं, तो आपको नया ठेका दिखे? या हो सकता है… कोई दुकान ही ना दिखे! झारखंड सरकार की नई नीति के तहत पूरे राज्य में शराब दुकानों का फिर से गणित तैयार किया गया है।

झारखंड सरकार ने पुरानी शराब नीति को संशोधित करते हुए एक नई व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है, जो 1 सितंबर से पूरे राज्य में प्रभावी होगी। पहले जहां कुल 1453 दुकानें चल रही थीं, अब यह संख्या घटकर सिर्फ 1343 रह जाएगी। इसमें 159 देसी शराब की दुकानें और 1184 कंपोजिट (देशी + विदेशी शराब बेचने वाली) दुकानें शामिल हैं। इस कदम के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है—व्यवस्था को पारदर्शी बनाना, अव्यवस्था पर लगाम लगाना और टैक्स वसूली को प्रभावी बनाना। सभी जिलों से दुकानों की सूची लेकर उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग अब बंदोबस्ती, आवेदन और लॉटरी प्रक्रिया की तैयारी में जुट गया है।

आइए अब नज़र डालते हैं जिलेवार उस लिस्ट पर, जो यह तय करेगी कि किस क्षेत्र में कितनी दुकानें बची रहेंगी। राजधानी रांची में सबसे अधिक 28 देसी और 122 कंपोजिट दुकानें रह जाएंगी, जबकि धनबाद में 24 देसी और 106 कंपोजिट दुकानें चलेंगी। इसके बाद गिरिडीह (7 देसी, 93 कंपोजिट), बोकारो (8, 67), देवघर (8, 63) और दुमका (8, 62) का नंबर आता है। वहीं कुछ जिले जैसे लोहरदगा (1 देसी, 10 कंपोजिट), गुमला (2, 13), लातेहार (4, 19) जैसे इलाकों में बहुत कम दुकानें होंगी।

यह डेटा दर्शाता है कि सरकार ने आबादी और खपत के आधार पर दुकानें तय की हैं—लेकिन सवाल उठता है, क्या यह नया बंटवारा न्यायसंगत है?

केवल संख्या नहीं, सामाजिक प्रभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कम दुकानें होंगी तो क्या अवैध शराब का नेटवर्क बढ़ेगा? क्या इससे रोजगार पर असर पड़ेगा? या फिर समाज में शराब की खपत कम होकर सकारात्मक बदलाव आएगा? सरकार का दावा है कि इससे व्यवस्था पारदर्शी बनेगी और लॉटरी सिस्टम के जरिए दुकानें उन्हीं को मिलेंगी जो पात्र होंगे। लेकिन साथ ही जमीनी स्तर पर निगरानी और ईमानदार क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी भी बढ़ेगी। यह बदलाव कितना सफल होगा, यह समय और सिस्टम की नीयत तय करेगी।

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