सोमवार से गिरिडीह के झंडा मैदान में शुरू हुआ डिजनीलैण्ड हस्तशिल्प मेला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, जो हर दिन शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा। इस मेले में करीब 200 दुकानों के जरिए भारत के विभिन्न प्रांतों की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को एक ही छत के नीचे सजाया गया है।

लखनउ की चिकनकारी कुर्तियाँ, सूरत के सूट पीस, दिल्ली की ब्लॉक प्रिंटिंग, बनारस और भागलपुर की साड़ियाँ, सहारनपुर का फर्नीचर और गिफ्ट आइटम, मुंबई की फैंसी चप्पलें और ज्वेलरी, राजस्थानी बैग, अचार, पापड़ और चूर्ण जैसे अनगिनत देशी उत्पाद यहाँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा कोरियन टेडी बेयर, फिरोजाबाद की चूड़ियाँ, बंगाल का कांथा वर्क, पानीपत के पर्दे और खादी ग्राम उद्योग के वस्त्र भी मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं।

मेले का मुख्य आकर्षण देशी-विदेशी झूले हैं जिनमें रेंजर झूला, चांद तारा, सुनामी झूला, ब्रेक डांस, टोरा टोरा और बच्चों के लिए अनेक नए-नए झूले शामिल हैं। स्वाद, परंपरा, खरीदारी और मनोरंजन का अद्भुत संगम बना यह मेला सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए खास अनुभव लेकर आया है।














