गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत तिरला पंचायत निवासी प्रवासी मजदूर लालचंद महतो (40) की दुबई में तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में मातम छा गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।जानकारी के अनुसार लालचंद महतो जनवरी 2026 में रोजगार की तलाश में दुबई गए थे। वहां करीब दो महीने तक एक कंपनी में काम करने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद वे रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। इसी दौरान उनका पासपोर्ट और वीजा भी गुम हो गया, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। वे लगातार भारत लौटने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण वतन वापसी संभव नहीं हो पा रही थी।परिजनों द्वारा मदद की गुहार लगाए जाने के बाद उनकी तलाश की जा रही थी। कुछ दिन पहले दुबई में कार्यरत झारखंड के कुछ प्रवासी मजदूरों ने उनसे संपर्क किया था। उन लोगों ने इंसानियत दिखाते हुए लालचंद को भोजन उपलब्ध कराया और उनकी घर वापसी की प्रक्रिया शुरू कराने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच उनके साथियों ने परिजनों को सूचना दी कि लालचंद की तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गई।

मौत की खबर मिलते ही परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलने पर प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले समाजसेवी सिकंदर अली पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने बताया कि परिवार पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लालचंद के पिता दशरथ महतो वर्ष 2013 से मुंबई से लापता हैं, जिससे परिवार की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने तथा मृतक का शव जल्द भारत लाने की व्यवस्था करने की मांग की।सिकंदर अली ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अधिक कमाई की उम्मीद में विदेश गए कई मजदूर फंस चुके हैं और कई की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गिरिडीह जिले के द्वारका महतो तथा बोकारो जिले के सत्येंद्र महतो का शव सऊदी अरब में पड़ा हुआ है। वहीं गिरिडीह के बगोदर निवासी महेंद्र महतो सऊदी अरब में फंसे हुए हैं और डुमरी के हुलास महतो दुबई की जेल में बंद हैं।
उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बावजूद मजदूर विदेश जाने से सबक नहीं ले रहे हैं। सरकार को चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि मजदूरों का मजबूरी में पलायन रोका जा सके।












