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अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत ने दोगुना खरीदा तेल, ट्रम्प बोले- रूस से रिश्ते ठीक नहीं

अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने के बावजूद भारत ने अप्रैल-जून 2025 तिमाही में अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद को दोगुना कर दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस दौरान भारत ने अमेरिका से करीब 32 हजार करोड़ रुपए का क्रूड ऑयल खरीदा, जो कि 2024 की समान तिमाही के मुकाबले 114% अधिक है। अप्रैल में ट्रम्प द्वारा टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भी भारत की अमेरिकी तेल खरीद में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली। आंकड़े बताते हैं कि 2025 की पहली छमाही में भारत ने हर दिन औसतन 2.71 लाख बैरल अमेरिकी कच्चा तेल खरीदा, जो पिछले साल के 1.8 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले कहीं ज्यादा है।

ट्रम्प ने हाल ही में भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत का रूस के साथ रक्षा और तेल के व्यापार को लेकर झुकाव चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है और यह स्थिति तब गंभीर हो जाती है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक स्तर पर शांति की कोशिशें हो रही हैं। ट्रम्प ने साफ कहा कि रूस से करीबी बढ़ाने पर भारत को टैरिफ के अलावा पेनल्टी भी झेलनी होगी। गौरतलब है कि वर्तमान में भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40% हिस्सा रूस से खरीदता है, जो प्रतिदिन 1.15 मिलियन बैरल के आसपास है।

हालांकि, रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट ने इस मोर्चे पर नया मोड़ ला दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने अमेरिकी दबाव और छूट में कमी के चलते रूस से तेल खरीद लगभग बंद कर दी है। रिफाइनिंग कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने रूस से ऑर्डर रोक दिए हैं क्योंकि वहां से मिलने वाला क्रूड अब उतना फायदेमंद नहीं रहा। साथ ही, शिपिंग और बीमा संबंधी दिक्कतों ने इस प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले सप्ताह में भारत की ओर से रूस से कोई नई तेल डील नहीं की गई है।

इन रिपोर्टों पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर भारत वास्तव में रूस से तेल खरीदना बंद कर रहा है, तो यह एक अच्छी बात है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इन खबरों की पूरी पुष्टि नहीं है। लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिकी नीति की सफलता का संकेत हो सकता है। वहीं, भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर की, लेकिन इसमें इन दावों की पुष्टि या खंडन नहीं किया गया। ऐसे में भारत की रणनीति क्या होगी और अमेरिकी दबाव में वह रूस से दूरी बनाएगा या नहीं, यह आने वाले हफ्तों में साफ होगा।

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