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सड़क और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर पीरटांड़ के नौ गांवों के ग्रामीण पहुंचे समाहरणालय, डीसी ने बुधवार को गांव आने का दिया आश्वासन, नहीं हुआ काम तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड के उत्तरी पारसनाथ क्षेत्र के नौ गांवों के ग्रामीणों ने शुक्रवार को सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर समाहरणालय पहुंचकर गिरीडीह उपयुक्त रामनिवास यादव से मिले। करीब 100 से अधिक महिला-पुरुषों ने उपायुक्त रामनिवास यादव को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी समस्याओं से अवगत कराया और शीघ्र समाधान की मांग की।ग्रामीणों ने बताया कि दलुवाडीह, कुरुवाटांड़, डाहिया, जिरुवाबेड़ा, सतकठिया, गडापारोम, सहरबेड़ा, इटाबेड़ा और बरवाबेड़ा गांव आजादी के सात दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सबसे बड़ी समस्या सड़क की है, जिसके कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि दलुवाडीह गांव की गर्भवती महिला सुनीता सोरेन को प्रसव पीड़ा होने पर सड़क नहीं रहने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरन ग्रामीणों ने उन्हें चारपाई पर करीब चार किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद अस्पताल ले जाया जा सका। इस तरह की घटना कई बार गांव में हुआ है

साथ ही बताया कि रास्ता नही रहने के कारण शादी विवाह में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है किसी किसी का तो शादी भी नही होती हैग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन द्वारा पूर्व में क्षेत्र का सर्वे किया जा चुका है, लेकिन अब तक सड़क निर्माण सहित किसी भी विकास कार्य की शुरुआत नहीं हुई है। सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का असर पूरे क्षेत्र के विकास और बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि उपायुक्त रामनिवास यादव से मुलाकात के दौरान उन्हें आश्वासन मिला है कि आगामी बुधवार को उपायुक्त स्वयं गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि यदि आश्वासन के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के निर्माण की दिशा में काम शुरू नहीं होने पर समाहरणालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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