बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल अपने चरम पर है। राज्य की 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान होना है — पहले चरण में 121 सीटों पर गुरुवार को वोट डाले जाएंगे, जबकि दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को मतदान होगा। पूरे राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज है, सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। IANS-Matrize के ओपिनियन पोल ने इस बार एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है — 63% लोगों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट डालने का मन बना चुके हैं। वहीं, करीब 9% मतदाता अभी भी असमंजस में हैं। इस सर्वे में कुल 73,287 लोगों से राय ली गई, जिनमें से अधिकांश ने मोदी की लोकप्रियता को एनडीए के लिए ‘चुनावी हथियार’ बताया है।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को बढ़त के संकेत मिल रहे हैं। सर्वे के अनुसार, 46% लोगों ने नीतीश कुमार को सीएम पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया है, जबकि महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव को केवल 15% समर्थन मिला है। हालांकि, बिहार की राजनीति हमेशा अप्रत्याशित मोड़ लेने के लिए जानी जाती है। पहले चरण का प्रचार मंगलवार को समाप्त हुआ और अब सभी राजनीतिक दल अपने-अपने गढ़ में मतदाताओं को साधने में जुटे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, 14 नवंबर को मतगणना होगी और तब यह तय होगा कि बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी। फिलहाल, एनडीए आत्मविश्वास से भरी दिख रही है, वहीं महागठबंधन के नेता युवाओं और बेरोजगारी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हालिया जनसभाओं में साफ संदेश दिया कि बिहार की जनता ने “जंगल राज” की वापसी न होने देने का मन बना लिया है। उन्होंने विपक्षी नेताओं — राहुल गांधी और तेजस्वी यादव — पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “दोनों राजकुमार बिहार को पीछे ले जाना चाहते हैं, लेकिन जनता अब जाग चुकी है।” पीएम मोदी ने कहा कि NDA की सरकार विकास, स्थिरता और विश्वास की प्रतीक है और इस चुनाव में जनता एक बार फिर रिकॉर्ड तोड़ समर्थन देगी। बिहार का यह चुनाव न केवल राज्य की राजनीति का भविष्य तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि मोदी फैक्टर 2025 में कितना असरदार बना हुआ है।












