गिरिडीह जिले में गुरुवार को भगवान चित्रगुप्त की पूजा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों तक भक्ति की लहर दौड़ गई। हर मोहल्ले, हर गली में पूजा पंडालों में भगवान चित्रगुप्त की आराधना का स्वर गूंजता रहा। चित्रांश समाज के लोगों ने विधि-विधान से पूजा कर भगवान चित्रगुप्त से समाज में ज्ञान, न्याय और सदाचार के मार्ग को मजबूत करने की प्रार्थना की। मुख्य पूजा कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और हवन से हुआ। शहर के वकालत खाना, बरमसिया, करबला रोड स्थित चित्रांश भवन, शास्त्री नगर, सिहोडीह, पुराना जेल परिसर और बनियाडीह समेत कई स्थानों पर पूजा-पाठ का आयोजन किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महिलाएँ पारंपरिक परिधान में सजी-धजी दिखीं, वहीं बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर उत्सव को और रंगीन बना दिया।

पूजा के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया और कई स्थानों पर सामूहिक भंडारा का आयोजन हुआ। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि भगवान चित्रगुप्त की आराधना केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि न्याय, लेखन-कर्म और नैतिकता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर स्थानीय युवाओं ने व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं, पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान चित्रगुप्त से समाज में शांति, समृद्धि और एकता की कामना की। इस पर्व ने गिरिडीह की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को एक बार फिर मजबूती से प्रदर्शित किया।












