पचम्बा में पारंपरिक गोपाल गौशाला मेला इस वर्ष अपने ऐतिहासिक 128वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह मेला हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धा, मनोरंजन और सांस्कृतिक धरोहर का संगम लेकर आने वाला है। आयोजकों के अनुसार, मेला 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2025 तक चलेगा। वर्षों से यह मेला स्थानीय परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक रहा है, जहाँ आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों की संख्या में लोग भाग लेते हैं। मेले में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

मेले की तैयारियाँ इन दिनों पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, और स्वास्थ्य शिविर की भी व्यवस्था की जा रही है। इस वर्ष मेले में बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए कई नई और रोमांचक राइड्स जोड़ी गई हैं, जिससे यह आयोजन पहले से कहीं अधिक भव्य और यादगार बनने जा रहा है।

इस वर्ष के मेले का सबसे बड़ा आकर्षण गुड़िया मारुति सर्कस, जलपरी, ब्रेकडांस, टावर झूला, ड्रैगन ट्रेन, अजमेरी कस्ती, डांसिंग फ्लाई, फ्रीभी झूला, मिक्की जंपिंग माउस, टोरा टोरा और तारा मची जैसी आकर्षक राइड्स होंगी। इन मनोरंजक झूलों के साथ-साथ खानपान के स्टॉल, पारंपरिक हस्तशिल्प की दुकानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा मेला क्षेत्र जीवंत हो उठेगा। पचम्बा का यह ऐतिहासिक मेला न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले आगंतुकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।












