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झारखंड के शमशान महाकाली मंदिर में अमावस्या की रात तांत्रिकों का मेला, सिद्धि प्राप्ति के लिए जुटेंगे साधक – 20 अक्टूबर को होगी विशेष पूजा

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित शमशान महाकाली मंदिर अपनी रहस्यमयी शक्तियों और तांत्रिक परंपराओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर उन दुर्लभ स्थलों में से एक है जहां हर अमावस्या की रात तंत्र साधना के लिए देश के कोने-कोने से अघोरी और तांत्रिक एकत्रित होते हैं। माना जाता है कि इस मंदिर में की गई साधना से सिद्धि प्राप्त होती है। अमावस्या की रात को मंदिर परिसर में पूरे वातावरण में गूंजते मंत्रों की ध्वनि रहस्यमय अनुभूति कराती है। इस बार 20 अक्टूबर को आयोजित होने वाली विशेष पूजा के दौरान भी यही अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा।

मंदिर के पुजारी बिट्टू बाबा के अनुसार, शमशान महाकाली मंदिर पूरे झारखंड और आसपास के राज्यों में अपनी अनोखी तांत्रिक परंपराओं के कारण विख्यात है। इस मंदिर में दो पंचमुंडी आसन मौजूद हैं, जो पूरे राज्य में और कहीं नहीं पाए जाते। तंत्र साधना में पंचमुंडी आसन का अत्यंत विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे सिद्धि प्राप्ति का आधार माना जाता है। बिट्टू बाबा ने बताया कि यहां तांत्रिक पंचमकार साधना और विशेष अनुष्ठान करते हैं, जो अत्यंत गुप्त रूप से सम्पन्न होता है। यही कारण है कि यह मंदिर न सिर्फ भक्तों बल्कि साधकों के बीच भी अत्यधिक लोकप्रिय है।

हिंदू धर्म में तंत्र साधना की देवी मां शमशान काली और मां तारा को विशेष रूप से पूजनीय माना गया है। इस मंदिर में इन दोनों देवियों की आराधना की जाती है। हर वर्ष अमावस्या की रात को देशभर के तांत्रिक इस मंदिर में पहुंचते हैं और पूरी रात तंत्र साधना में लीन रहते हैं। बताया जा रहा है कि इस वर्ष की पूजा रात 8 बजे से आरंभ होगी, जिसमें साधक सिद्धि प्राप्ति के उद्देश्य से विशेष मंत्र साधना करेंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए हैं ताकि भक्त और साधक दोनों ही बिना किसी बाधा के अपनी साधना और पूजा पूरी कर सकें।

हजारीबाग के खिरगांव मुक्तिधाम के पास स्थित शमशान महाकाली मंदिर रहस्यमय कथाओं से भरा हुआ है। कहा जाता है कि यहां भूमिगत गर्भगृह भी है, जहां कई बार साधना के दौरान अद्भुत प्रकाश और ध्वनियां देखी-सुनी गई हैं। लाखों श्रद्धालु इस मंदिर में अपनी आस्था व्यक्त करने पहुंचते हैं, विशेषकर महाकाली पूजा के दिन। इस बार भी 20 अक्टूबर की अमावस्या पर मंदिर परिसर में भक्तों और तांत्रिकों का विशाल जमावड़ा लगने की संभावना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

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