राजस्थान के जैसलमेर में शनिवार को हुए दर्दनाक बस अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। वार म्यूजियम के पास खड़ी एक निजी बस में अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस में उस समय 57 यात्री सवार थे। कई यात्री अपनी जान बचाने के लिए जलती बस से कूद पड़े, जबकि 20 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। जिला प्रशासन के मुताबिक, मृतकों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई शवों की पहचान भी मुश्किल हो गई है, जिसके चलते डीएनए टेस्ट के जरिए पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हादसे की जानकारी मिलते ही जैसलमेर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने जिला कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत, पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे सहित प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद मुख्यमंत्री जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने बर्न यूनिट में भर्ती घायलों से मुलाकात की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने चिकित्सकों को हर संभव उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
जैसलमेर से जोधपुर जा रही बस (संख्या RJ 09 PA 8040) में सवार यात्रियों में कई स्थानीय लोग और व्यापारी शामिल थे। इस भीषण हादसे में स्थानीय पत्रकार राजेंद्र सिंह चौहान और केमिस्ट एसोसिएशन के मनोज भाटिया भी सवार थे। बताया जा रहा है कि दोनों किसी कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, इसी दौरान बस में आग लग गई। मनोज भाटिया गंभीर रूप से झुलसने के बावजूद किसी तरह बस से बाहर निकल आए, लेकिन राजेंद्र सिंह चौहान अंदर ही फंस गए और उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं—9414801400, 8003101400, 02992-252201, 02992-255055—ताकि वे सहायता प्राप्त कर सकें।
इस हादसे ने राजस्थान ही नहीं, पूरे देश को गमगीन कर दिया है। आग लगने के बाद बस के चारों ओर अफरातफरी मच गई, स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुट गए, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही देर में सब कुछ राख में बदल गया। राहत और बचाव कार्य सेना और प्रशासन की मदद से देर रात तक चलता रहा। सभी शवों को सेना के ट्रकों से जोधपुर लाया जा रहा है, जहां पोस्टमॉर्टम और डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता और मुआवजा देने का भरोसा दिलाया है। यह हादसा राजस्थान के हालिया इतिहास की सबसे भीषण दुर्घटनाओं में से एक के रूप में दर्ज हो गया है।












