गिरिडीह, 14 अक्टूबर 2025: नगर भवन में आज सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड (सिद्धकोफेड) के तहत जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों और वनोपज संग्रहकर्ताओं को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे लाभ पहुंचाना था। कार्यशाला का शुभारंभ जिला उपायुक्त श्री रामनिवास यादव, उप विकास आयुक्त श्रीमती स्मृता कुमारी और जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त श्री यादव ने कहा कि अब ग्रामीणों और अनुसूचित जनजातियों को वनोपज का सीधा मालिकाना हक मिलेगा। प्रशासन ने सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज सहकारी संघ के माध्यम से वनोपज उत्पादकों को उनका उचित पारिश्रमिक दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। धान, गेहूं, महुआ, लाह, इमली, करंज, चिरौंजी और अन्य उत्पादों के संकलन, प्रसंस्करण और विपणन को सहकारी ढांचे में जोड़ने से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अब ठिकेदारी प्रथा समाप्त कर किसानों और संग्रहकर्ताओं को उनके उत्पाद का अधिकतम मूल्य मिल सकेगा, जिससे उनकी आजीविका में स्थायी सुधार होगा।
वन प्रमंडल पदाधिकारी ने कहा कि सिद्धकोफेड एक राज्य स्तरीय शीर्ष सहकारी संस्था है जो कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार से निबंधित है। यह संस्था किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन और कृषि अवसंरचना से जुड़ी सुविधाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिला सहकारिता पदाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारी समितियों और निजी कंपनियों के बीच विपणन के लिए संस्थागत सहयोग बढ़ाना, लाह और शहद जैसे उत्पादों में वृद्धि लाना तथा प्रधानमंत्री किसान समृद्धि योजना के तहत योग्य MPCS का चयन करना इस कार्यशाला के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। इस एक दिवसीय कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि सभी MPCS को जिला सहकारी यूनियन से जोड़कर क्रेडिट लिंकिंग की सुविधा दी जाए, जिससे किसानों के कृषि एवं वनोपज उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।












