गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत नईटांड निवासी डॉ. रणधीर कुमार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराने जा रहे हैं। वे 3 से 6 अक्टूबर 2025 तक वियतनाम की राजधानी हनोई में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह सम्मेलन यूनिसेफ, यूनिस्को, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, यूनाइटेड नेशन वीमन, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से आयोजित हो रहा है। इसमें विश्वभर के सैकड़ों प्रतिनिधि शामिल होंगे और शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, मानवाधिकार एवं वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।
डॉ. रणधीर कुमार यूनाइटेड नेशंस एजुकेशन, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनिस्को) की ओर से भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस दौरान वे भारत में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, आदिवासी संस्कृति और कला पर प्रकाश डालेंगे। इसके अलावा वे “शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, भारतीय परंपरा, संस्कृति और कला की संरक्षण में यूनिस्को की प्रासंगिकता” विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर वे संयुक्त राष्ट्र से भारत में शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सहयोग की अपील भी करेंगे।
डॉ. रणधीर का जीवन संघर्ष और उपलब्धियों से भरा हुआ है। वे गिरिडीह जिले के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पूर्व प्रधानाध्यापक दिनेश्वर वर्मा के पौत्र और शिक्षक दीनदयाल प्रसाद के पुत्र डॉ. रणधीर ने अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी की उपाधि हासिल की है। उन्होंने झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी, आईआईएम रांची और लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा ग्रहण की है। युवा अवस्था में ही उन्होंने शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिले। उनके नाम आठ पुस्तकों का लेखन और 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोधपत्र प्रस्तुति का गौरव भी जुड़ा है।
वर्तमान में डॉ. रणधीर कई शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं। वे नमन इंटरनेशनल फाउंडेशन एवं एनएचआरसीसीबी के चेयरमैन हैं और देशभर में मानवाधिकार एवं शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में हजारों लोग समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। अपनी इस बड़ी उपलब्धि के लिए उन्होंने अपने परिवार, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का आभार व्यक्त किया है। निस्संदेह, उनका यह प्रतिनिधित्व गिरिडीह जिला ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।












