भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि इस वर्ष के अंत तक भारत-ईयू FTA को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर चल रही तनातनी के बीच यह खबर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। दरअसल, ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया है, जिससे न केवल भारत बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। वहीं दूसरी ओर, यूरोप ने यह साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ व्यापार को बिना टैरिफ बाधा के और ज्यादा मजबूती से आगे बढ़ाना चाहता है।
यूरोपीय संघ ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने के लिए एक नया एजेंडा पेश किया है। इसमें आर्थिक विकास को गति देने, सुरक्षा सहयोग मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने की बात कही गई है। लेयेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अब समय आ गया है कि भरोसेमंद साझेदारों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी जाए और साझा मूल्यों के आधार पर रिश्तों को नए स्तर पर ले जाया जाए।” यूरोपीय संघ का मानना है कि भारत एक तेजी से उभरती हुई आर्थिक ताकत है और वैश्विक परिदृश्य में उसकी भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। ऐसे में, यूरोप भारत को अपना सबसे बड़ा व्यापारिक और रणनीतिक साझेदार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नए एजेंडे को यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के सामने रखा जाएगा और अगले वर्ष होने वाले भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में इसे अपनाए जाने की संभावना है। इसमें सुरक्षा, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्थिरता और समृद्धि जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों को साझा हित के तौर पर चिह्नित किया गया है। भारत पहले से ही यूरोप का अहम व्यापारिक साझेदार है और दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न केवल व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाई देगा बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत और यूरोप के बीच निवेश, रोजगार और औद्योगिक सहयोग को एक नई दिशा देगा, जबकि अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल खड़े करेगा।












