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सीक्रेट चिट्ठी से पिघली बर्फ: जिनपिंग की पहल से सुधरे भारत-चीन रिश्ते, पीएम मोदी जाएंगे चीन

भारत और चीन के रिश्तों में आई नई गर्मजोशी के पीछे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक गुप्त चिट्ठी को अहम माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जिनपिंग ने यह चिट्ठी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखी थी, जिसमें उन्होंने अमेरिका और भारत के बीच होने वाले संभावित समझौतों से चीन के हितों को हो सकने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी। इस पत्र के जरिए बीजिंग ने भारत से संबंध सुधारने की इच्छा जताई थी। यही पहल आगे चलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे की राह खोलने में मददगार साबित हुई।

रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2025 में अमेरिका द्वारा चीन पर बढ़ाए गए टैरिफ और व्यापार युद्ध के बीच बीजिंग ने भारत से गुपचुप तरीके से संवाद शुरू किया। जिनपिंग की इस चिट्ठी को प्रधानमंत्री मोदी तक भी पहुंचाया गया, ताकि भारत यह आकलन कर सके कि संबंध सुधारने की कितनी संभावनाएं हैं। हालांकि, शुरू में भारत ने इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया और ट्रम्प ने भारत-पाकिस्तान में सीजफायर का दावा कर मोदी सरकार को नाराज किया, तब भारत ने चीन की ओर से आई इस पहल को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।

जून के बाद हालात तेजी से बदले और दोनों देशों ने सीमा विवाद पर बातचीत को आगे बढ़ाने का फैसला किया। अगस्त तक भारत और चीन ने गलवान झड़प के बाद रुकी वार्ताओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए सहमति बनाई। अब प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा करने जा रहे हैं, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात न केवल एशियाई राजनीति के लिहाज से अहम होगी, बल्कि अमेरिका भी इस पर कड़ी नजर रखेगा, क्योंकि यह उसके लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की नीतियों ने भारत और चीन को एक-दूसरे के करीब आने के लिए मजबूर कर दिया। अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट के विश्लेषक एशले टेलिस ने टिप्पणी की कि “ट्रम्प असली शांतिदूत साबित हुए, जिन्होंने भारत और चीन को करीब ला दिया।” वहीं, भारत और चीन का कारोबारी जगत भी इस अवसर का फायदा उठाने की तैयारी कर रहा है। अडानी समूह जहां चीन की BYD के साथ बैटरी उत्पादन पर साझेदारी पर विचार कर रहा है, वहीं रिलायंस और JSW समूह भी चीनी कंपनियों से गुप्त समझौते कर रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी का चीन दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

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