रांची, 27 अगस्त 2025। झारखंड सरकार ने राज्य में संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अब तक राज्य में कोचिंग सेंटरों को लेकर कोई स्पष्ट नियम या व्यवस्था नहीं थी, लेकिन “कोचिंग सेंटर रेगुलेशन एक्ट” लाकर सरकार ने छात्रों और अभिभावकों को सुरक्षा प्रदान करने का रास्ता तैयार किया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब कोचिंग सेंटरों की पहचान, पंजीकरण, फीस संरचना और छात्रों की सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
सरकार ने इस एक्ट के तहत कई नई व्यवस्थाएं की हैं। सबसे पहले, हर कोचिंग संस्थान को एक यूनिक CCR ID (Coaching Centre Registration ID) दी जाएगी, जिसके आधार पर उनकी वैधता तय होगी। वहीं छात्रों के लिए CED ID (Coaching Enrolment Data ID) बनाई जाएगी, जिसमें यह दर्ज होगा कि छात्र किस कोचिंग में पढ़ रहा है और किस पाठ्यक्रम में नामांकित है। साथ ही, शिक्षकों के लिए CTR ID (Coaching Tutor Registration ID) जारी होगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई शिक्षक एक समय में एक से अधिक कोचिंग संस्थानों में पढ़ा नहीं सकता।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जिन संस्थानों में 1000 से अधिक छात्र होंगे, वहां एक प्रशिक्षित मनोचिकित्सक रखना अनिवार्य होगा। इसके लिए CMC ID (Coaching Mental Care ID) जारी की जाएगी। इसका मकसद कोटा जैसे राज्यों में होने वाली आत्महत्या की घटनाओं को रोकना और बच्चों को सुरक्षित माहौल देना है। साथ ही, कोचिंग संस्थानों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पाठ्यक्रम की पूरी फीस और फीस वापसी की शर्तें स्पष्ट करनी होंगी, ताकि छात्रों और अभिभावकों को पारदर्शी जानकारी मिल सके।
सरकार ने कोचिंग संस्थानों की फ्रैंचाइज़ पर भी सख्ती दिखाई है। यदि किसी शहर में एक फ्रैंचाइज़ छात्र का शोषण करती है या नियमों का उल्लंघन करती है, तो पूरे राज्य में उस संस्थान की अन्य यूनिट्स को भी बंद किया जा सकेगा। वहीं, फीस वसूली और विंड अप पॉलिसी को भी अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं, व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों की मनमानी फीस पर भी रोक लगाने के लिए सरकार ने “फीस रेगुलेशन कमिटी” बनाने का फैसला लिया है। यह कमिटी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित होगी और तीन साल के लिए सभी व्यावसायिक कोर्सों की फीस का निर्धारण करेगी।
कुल मिलाकर, नए कानूनों और नीतियों के लागू होने से झारखंड के छात्रों और उनके अभिभावकों को पारदर्शी और सुरक्षित शिक्षा प्रणाली मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा और भविष्य में छात्रों का आर्थिक और मानसिक शोषण रोका जा सकेगा।












