भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव के बीच बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार 13 साल बाद बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुँचे हैं। यह दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब बांग्लादेश की सत्ता परिवर्तन के बाद विदेश नीति में बदलाव की संभावनाएँ दिखाई दे रही हैं। डार का मकसद ढाका से रिश्तों को फिर से मजबूत करना बताया जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस यात्रा के पीछे भारत को कूटनीतिक घेराबंदी करने की रणनीति भी छिपी हो सकती है।
इस यात्रा के दौरान डार की मुलाकात बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन और अंतरिम सरकार प्रमुख मुहम्मद यूनुस से होगी। आधा दर्जन एमओयू और समझौतों पर हस्ताक्षर की तैयारी है। वहीं यह भी चर्चा है कि वे विपक्षी नेताओं खालिदा जिया और जमात-ए-इस्लामी नेताओं से भी मिल सकते हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि बातचीत का एजेंडा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी गहन चर्चा होगी। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पाकिस्तान चीन के साथ भी अपनी नजदीकियों को नए आयाम दे रहा है और आर्थिक-रणनीतिक मोर्चे पर “सीपेक 2.0” की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान, भारत-बांग्लादेश रिश्तों में आई हालिया दरार का फायदा उठाकर ढाका को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि यह राह आसान नहीं है, क्योंकि अगले साल बांग्लादेश में आम चुनाव हैं और सत्ता परिवर्तन की स्थिति में भारत-बांग्लादेश रिश्ते दोबारा पटरी पर लौट सकते हैं। साथ ही, भारत और चीन के बीच भी संबंधों में सुधार की झलक दिखने लगी है। ऐसे में पाकिस्तान का यह कदम भारत को घेरने की रणनीति का हिस्सा तो लगता है, लेकिन ढाका के साथ उसकी यह डिप्लोमैटिक बाज़ी कितनी सफल होगी, इसका जवाब वक्त ही देगा।












