दिल्ली में एक बार फिर शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गुरुवार सुबह राजधानी के 6 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई, जिसके बाद छात्रों और अभिभावकों में अफरा-तफरी मच गई। प्रसाद नगर और द्वारका समेत जिन स्कूलों को धमकी मिली, उनमें आंध्रा स्कूल, BGS स्कूल, राव मान सिंह स्कूल, CR कॉन्वेंट स्कूल, मैक्स फोर्ट स्कूल और इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल स्कूल शामिल हैं। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ते और अग्निशमन विभाग मौके पर पहुंच गए और स्कूल परिसरों में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि अब तक किसी भी स्कूल से संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। ठीक एक दिन पहले बुधवार को भी करीब 50 स्कूलों को बम धमाकों की धमकी दी गई थी, जिससे पूरे दिल्ली-एनसीआर में हड़कंप मच गया था। द्वारका स्थित राहुल मॉडल स्कूल, मालवीय नगर का एसकेवी और प्रसाद नगर का आंध्रा स्कूल समेत कई संस्थानों को ईमेल के जरिए धमकी भेजी गई थी। इसके अलावा 18 अगस्त को भी 32 स्कूलों को इसी तरह के धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे, जो बाद में झूठे साबित हुए। बार-बार दोहराई जा रही इन घटनाओं ने न सिर्फ छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और कार्यप्रणाली को भी कटघरे में ला दिया है।
इधर, आम आदमी पार्टी ने इस मसले पर बीजेपी सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा है। ‘आप’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “दिल्ली के स्कूलों को लगातार बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं। यह अब एक सिलसिला बन चुका है, लेकिन केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस सोई हुई है।” पार्टी ने आरोप लगाया कि इन धमकियों से बच्चों और अभिभावकों में खौफ का माहौल है, छात्र स्कूल जाने से डर रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा है। अब सवाल ये है कि क्या बार-बार की जा रही इन धमकियों को हल्के में लेना बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं है?












