भारत की सुरक्षा ताकत को और धार देने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को 67 हज़ार करोड़ रुपये की भारी-भरकम रक्षा खरीद को हरी झंडी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक मिसाइल, ड्रोन, एयरक्राफ्ट और फायर कंट्रोल सिस्टम की खरीद को मंज़ूरी मिली है। यह फैसला ऐसे वक्त पर आया है जब भारत और अमेरिका के बीच 36 MQ-9 प्रीडेटर ड्रोन की डील के बावजूद उसकी सप्लाई में देरी हो रही है। ऐसे में भारत अब आत्मनिर्भरता की दिशा में नया सैन्य रोडमैप तैयार करता दिख रहा है।
रक्षा खरीद परिषद (DAC) की इस महत्वपूर्ण बैठक में CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने भाग लिया। बैठक में निर्णय लिया गया कि तीनों अंगों की ताकत बढ़ाने के लिए मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (MALE) ड्रोन की खरीद की जाएगी, जो न केवल निगरानी करेंगे, बल्कि हथियारों से भी लैस होंगे। नौसेना के लिए जहां ब्रह्मोस मिसाइल फायर कंट्रोल सिस्टम और समुद्री ड्रोन की खरीद को हरी झंडी मिली है, वहीं थलसेना को BMP व्हीकल्स के लिए नई थर्मल इमेज साइट्स दी जाएंगी। वायुसेना के लिए माउंटेड रडार, सक्षम और स्पाइडर वेपन सिस्टम अपग्रेड के साथ-साथ C-17 और C-130 विमानों की देखरेख का भी प्रावधान किया गया है।
इन फैसलों से यह साफ है कि भारत अपनी तीनों सेनाओं को भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार कर रहा है — वो भी तब जब पड़ोसी देश पाकिस्तान तुर्की से बायरेक्टर यूएवी खरीद चुका है। भारत की यह तैयारी सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत सैन्य ताकत बनने की दिशा में एक और मजबूत कदम है।












