दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, जो कई मायनों में खास माना जा रहा है। पहली बार यह सत्र पूरी तरह डिजिटल, यानी पेपरलेस फॉर्मेट में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इस सत्र में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष विधेयक पेश करेंगी, जो लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत की उम्मीद है। लंबे समय से अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली की शिकायत करते रहे हैं, और अब सरकार इस समस्या पर सख्ती दिखाने जा रही है। यह नया कानून निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाम लगाने और फीस में पारदर्शिता लाने का काम करेगा।
इस सत्र में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दो अहम नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टें भी विधानसभा में पेश करेंगी। पहली रिपोर्ट वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान दिल्ली सरकार की आमदनी और खर्चे की स्थिति की समीक्षा करती है, जबकि दूसरी रिपोर्ट भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए खर्च की गई राशि की जांच से संबंधित है। ये रिपोर्टें उस समय की हैं जब आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली में सत्ता में थी। बीते दिनों भाजपा सरकार ने CAG रिपोर्टों के आधार पर आप सरकार पर वित्तीय गड़बड़ी और फंड के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बार की रिपोर्टों से साफ होगा कि निर्माण श्रमिकों के लिए जुटाई गई राशि का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं।
दिल्ली सरकार हर साल विधानसभा में CAG रिपोर्ट पेश करती है, जो सरकारी विभागों की लेखा परीक्षा और वित्तीय प्रबंधन की स्थिति का विस्तृत लेखा-जोखा होती हैं। इन रिपोर्टों के माध्यम से सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की जांच होती है। मानसून सत्र में विपक्ष खासकर AAP विधायक इन रिपोर्टों को लेकर तीखे सवाल पूछ सकते हैं और अपने कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं से खुद को बरी करने का प्रयास करेंगे। इस बहस से राजनीतिक गरमाहट बढ़ने की पूरी संभावना है।
अभी सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि फीस नियंत्रण विधेयक और CAG रिपोर्टों को लेकर विधानसभा में क्या बहस होती है और सरकार किन सुधारों का रास्ता खोलती है।












