एक तरफ मॉनसून की बारिश राहत की बूंदें लेकर आई, तो दूसरी तरफ वही पानी बन गया जानलेवा ज़हर। जमशेदपुर के पूर्वी सिंहभूम जिले से आ रही खबरें चौंका रही हैं, जहां डेंगू के संदिग्ध मामलों में दो महिलाओं की मौत हो चुकी है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग अब तक इन मौतों को लेकर खामोश है! TKN की पड़ताल में सामने आया है कि दोनों ही मामलों में लक्षण डेंगू के थे, इलाज ICU में हुआ, पर सरकार के पास पुष्टि के लिए अब तक कोई जवाब नहीं! सवाल ये है कि अगर मौतें डेंगू से नहीं हुईं, तो फिर कैसे हुईं? और अगर हुईं, तो क्या यह प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है?
35 वर्षीय वीणा सिंह और 40 वर्षीय पुतुल लोहरा, ये दो नाम अब डेंगू से जुड़े डरावने अध्याय बनते जा रहे हैं। छोटा गोविंदपुर की रहने वाली वीणा सिंह को तेज बुखार, उल्टी, दस्त, सांस लेने में दिक्कत और शरीर में तेज दर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ICU में इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार, डॉक्टरों ने शुरुआत में डेंगू की आशंका जताई थी, और प्रारंभिक जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव भी आई थी। लेकिन सरकारी पुष्टि अभी तक नहीं हुई। इसी तरह, पुतुल लोहरा को पहले टेल्को अस्पताल और फिर रांची रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने मल्टी ऑर्गन फेल्योर को मौत का कारण बताया – डेंगू के कारण। फिर भी, सिविल सर्जन कहते हैं – “मामले की जानकारी नहीं है”!
जब मौतें हो रही हैं और लक्षण सामने हैं, तो सरकारी पुष्टि का इंतजार क्यों? डेंगू से जुड़े इन दोनों मामलों में यदि समय पर सही इलाज और निगरानी होती, तो शायद जानें बचाई जा सकती थीं। सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग लापरवाही कर रहा है? जिले में अब तक डेंगू के कुल 21 मामले सामने आ चुके हैं। ताजा दो मामले टेल्को और छोटा गोविंदपुर से आए हैं, जिनमें मरीजों को तेज बुखार, सिर दर्द और कमजोरी जैसे क्लासिक डेंगू लक्षण हैं। अब जब ये सब सामने आ चुका है, तो क्या प्रशासन किसी बड़े विस्फोट का इंतजार कर रहा है?
स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि फॉगिंग और सैंपल कलेक्शन तेज़ कर दिया गया है। लेकिन TKN की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कई मोहल्लों में अब भी गंदा पानी जमा है, फॉगिंग की कोई नियमितता नहीं है, और ना ही लोगों को जागरूक करने के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया है। आंकड़े कह रहे हैं कि मानगो, बारीडीह, गोविंदपुर और टेल्को जैसे इलाके डेंगू के हॉटस्पॉट बन चुके हैं। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।












