उम्र केवल एक संख्या है या जीवन की सबसे बड़ी सीमा? पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के 90 वर्षीय महावीर साहू ने इस सवाल का जबरदस्त जवाब दिया है। जब ज्यादातर लोग उम्र के इस पड़ाव पर थकान और कमजोरी का सामना करते हैं, तब महावीर साहू ने नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान से अपनी सेहत ऐसी बनाई कि कई युवा भी उनकी फिटनेस के आगे फीके पड़ गए। उनकी यह कहानी सिर्फ प्रेरणा ही नहीं, बल्कि साबित करती है कि उम्र को कभी भी अपनी क्षमता और जीवन की ऊर्जा पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
महावीर साहू उर्फ बिलौटी साहू, जो रबदा ग्राम तुमबागड़ा के निवासी हैं, पिछले 10 वर्षों से रोजाना सुबह 4 बजे उठकर योगासन, सूर्य नमस्कार, भस्त्रिका प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करते हैं। उनका मानना है कि यह ‘निमित्त व्यायाम’ ने न केवल उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाया है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास भी दिया है। साहूजी की दिनचर्या में तनाव मुक्त रहने के तरीके और आत्म-शक्ति को बनाए रखने के कई राज छुपे हैं, जो वे हर किसी से साझा करना चाहते हैं।
महावीर साहू ने बताया कि वे अभी भी रोजाना 5 से 10 किलोमीटर पैदल चल सकते हैं और दैनिक हल्के भोजन का सेवन करते हैं, जिसमें दलिया, ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल हैं। उनका कहना है कि जीवन में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच स्वास्थ्य का मूलमंत्र हैं। उन्होंने कहा, “यदि आप अपनी दिनचर्या में योग और ध्यान को शामिल कर लें, तो उम्र कभी आपको कमजोर नहीं कर पाएगी।” यह बात सुनकर हर युवा हैरान रह जाता है कि कैसे 90 की उम्र में भी साहूजी की ऊर्जा किसी युवा से कम नहीं।
महावीर साहू की कहानी न सिर्फ पलामू के लिए, बल्कि पूरे झारखंड और भारत के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। वे कहते हैं, “जिंदगी में कभी हार मत मानो। उम्र सिर्फ एक नंबर है, इसे अपनी जिंदगी की सीमा मत बनने दो। योग और ध्यान से मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्तरों पर तंदरुस्ती बनी रहती है।” साहूजी के इस संदेश ने बहुत से युवाओं को भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है, जिससे वे तनावमुक्त होकर जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो रहे हैं।












