शांत रात थी, आसमान में बस चांदनी थी और गाड़ी में बैठे श्रद्धालुओं के दिलों में नैणा देवी के दर्शन की संतुष्टि। मगर किसे पता था कि यह आस्था से भरी वापसी की यात्रा, एक भयावह हादसे में तब्दील हो जाएगी। पंजाब के लुधियाना जिले के खन्ना क्षेत्र से बीती रात एक दिल दहला देने वाली खबर आई है, जिसने न सिर्फ कई घरों के चिराग बुझा दिए, बल्कि एक बार फिर सिस्टम की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नैणा देवी के दर्शन करके लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो गाड़ी जगेड़ा पुल के पास अनियंत्रित होकर तेज बहाव वाली नहर में जा गिरी। हादसा रात करीब 12 बजे हुआ, जब दृश्यता बेहद कम थी और पानी का बहाव तेज़। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ ही पलों में गाड़ी गुम हो गई, और फिर शुरू हुई चीख-पुकार की वो लहर, जिसने पूरे गांव को जगा दिया।
इस बोलेरो पिकअप में करीब 10 से 15 श्रद्धालु सवार थे, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे। गाड़ी मलेरकोटला लौट रही थी, जब चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और कई लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पानी में छलांग लगा दी। कई श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अब भी कई लोग लापता हैं। रात के अंधेरे में जहां बचाव अभियान में बाधा आ रही थी, वहीं पुलिस और प्रशासन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। डूबे हुए श्रद्धालुओं की तलाश अब भी जारी है। कुछ घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
जैसे ही हादसे की सूचना प्रशासन तक पहुंची, जिला अधिकारी, पुलिस और NDRF की टीम मौके पर पहुंच गई। युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में गोताखोरों, फायर ब्रिगेड और स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद ली जा रही है। सुबह होते ही लापता लोगों की पहचान और जानकारी जुटाने का काम तेज़ कर दिया गया। वहीं प्रशासन ने जनता से भीड़ न लगाने की अपील की है, ताकि बचाव कार्य में कोई रुकावट न हो। हादसे की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या इस पुल पर पर्याप्त चेतावनी संकेत, रेलिंग या रोशनी मौजूद थी या नहीं? क्या वाहन चालक ने लापरवाही की थी? और सबसे अहम, क्या ये एक टल सकने वाला हादसा था?












