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कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बड़ा बदलाव: नया टैक्स कोड और आईटीआर फॉर्म में अपडेट!

डिजिटल दुनिया में कमाई करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के लिए एक बड़ा और अहम अपडेट आया है। अगर आप भी यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स से कमाई करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फॉर्म में ऐसा बदलाव किया है, जो इस डिजिटल जमाने के क्रिएटर्स की कमाई पर नियंत्रण और पारदर्शिता लाएगा। खास बात यह है कि अब इनके लिए एक नया प्रोफेशनल कोड 16021 जारी किया गया है, जिससे टैक्स विभाग को इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स की आमदनी पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

आयकर विभाग ने इस नए कोड को ITR-3 और ITR-4 (सुगम) दोनों फॉर्म्स में जोड़ा है। इससे पहले इंफ्लुएंसर्स के लिए कोई अलग श्रेणी नहीं थी और उन्हें ‘अन्य’ के अंतर्गत टैक्स रिटर्न भरना पड़ता था, जिससे उनकी वास्तविक आय छुपाई जा सकती थी। अब यह कोड ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से रिटर्न भरते वक्त उपलब्ध होगा। क्रिएटर्स को अब अपनी आय और टैक्स भुगतान के आधार पर या तो ITR-3 फॉर्म भरना होगा, जिसमें कारोबार या प्रोफेशनल आय की विस्तृत जानकारी होती है, या ITR-4 फॉर्म जिसमें प्रीमप्टिव टैक्स विकल्प चुनकर सरल प्रक्रिया से रिटर्न फाइल किया जा सकता है। यह बदलाव टैक्स अनुपालन को आसान बनाने के साथ-साथ टैक्स चोरी को रोकने में भी मदद करेगा।

देश में डिजिटल इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है और इसकी अनुमानित बाजार कीमत 2025 के अंत तक लगभग 2.8 अरब डॉलर यानी करीब 23,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने वाली है। ऐसे में सरकार डिजिटल कमाई पर नजर रख रही है, खासकर उन लोगों की जिनकी कमाई सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से हो रही है। इस नए कोड से आयकर विभाग इंफ्लुएंसर्स की कमाई का बेहतर आंकलन कर सकेगा और टैक्स वसूली में तेजी आएगी। यह कदम डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, ऑनलाइन कोच, ब्लॉगर्स, और गिग वर्कर्स के लिए टैक्स अनुपालन को सरल, पारदर्शी और कड़ा बनाएगा।

अगर आप सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स हैं, तो आपकी इनकम के हिसाब से फॉर्म का चयन करना महत्वपूर्ण है। जिनकी कुल आय में सैलरी, प्रॉपर्टी या अन्य स्रोत भी शामिल हैं और जिनका कारोबार या प्रोफेशन है, उन्हें ITR-3 फॉर्म भरना होगा। वहीं, जो प्रीमप्टिव टैक्स विकल्प चुनते हैं, यानी टैक्स की एक निश्चित राशि पहले से देना चाहते हैं और उनकी आय 50 लाख रुपए तक है, वे ITR-4 (सुगम) फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रखें कि टैक्स रिटर्न भरने से पहले अपना एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS जरूर चेक करें, ताकि आपकी कमाई और टैक्स कटौती का पूरा हिसाब सही मिले।

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