गिरिडीह के बरवाडी कर्बला मैदान में मोहर्रम की सातवीं तारीख को आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जांबाज़ साथियों की शहादत की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने चादरपोशी, गुलपोशी और नजर-ओ-नियाज़ के साथ अपनी मन्नतें पूरी होने पर अकीदत पेश की। बरसात को देखते हुए मैनेजिंग कमेटी द्वारा बेहतरीन पंडाल और शामियाने की व्यवस्था की गई थी।

हज़रत इमाम कासिम अलैहिस्सलाम की शहादत और नेहरे फोरात पर पानी बंद किए जाने की दर्दनाक यादें श्रद्धालुओं की आंखें नम कर गईं। कार्यक्रम की व्यवस्था में जनाब आबिद हुसैन, गांधी मोहम्मद सेरु, सरफराज, मोहम्मद नौशाद उर्फ मुन्ना, मोहम्मद मोइन आजाद, मोहम्मद तारीख खाजिन, मास्टर मोहम्मद अख्तर अंसारी, मोहम्मद सरफुद्दीन, मंसूर वारसी सहित कई ज़िम्मेदारों ने अहम भूमिका निभाई। श्रद्धा, इतिहास और इंसाफ की इस मिसाल को याद कर लोगों ने इमाम हुसैन के उसूलों को सलाम किया।













