कांग्रेस नेता उदित राज ने सोमवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के “क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है” वाले बयान पर कहा कि यह उनका अपना व्यक्तिगत दर्द और अनुभव है, जो उन्होंने जाहिर किया है। सलमान खुर्शीद इन दिनों पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद विरोधी भारत के रुख को उजागर करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कई देशों के दौरे पर हैं।
उदित राज ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उन्होंने जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है कि विदेश की धरती पर जब हम हैं और प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, तो वहां हमें एकता का परिचय देना चाहिए। मैं उस बात से सहमत हूं। दूसरी बात है कि मोदी भक्ति अलग है, राष्ट्रभक्ति अलग है। व्यक्ति भक्ति में हम यकीन नहीं करते हैं, व्यक्ति भक्ति की हम आलोचना करते हैं, बिना वजह व्यक्ति भक्ति से देश पर असर पड़ता है। मुझे लगता है कि बाटला हाउस के मामले में सलमान खुर्शीद को घेरा गया, जब उन्होंने इस पर किताब लिखी थी, उसमें एक शब्द “बोको हराम” का जिक्र किया था, उसके बाद उनका जीना हराम कर दिया था भाजपा ने। उनकी राष्ट्रीयता, देशभक्ति पर तमाम प्रश्न खड़े किए थे।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि उनका वही दर्द झलकता है कि यह जो देशहित में बोलना है, क्या कोई गलत बात है या अपना तजुर्बा वह बता रहे हैं कि किस तरह से उन्होंने जो सही काम किया था, उसके ऊपर भी उंगली उठाई गई थी और एक मतलब है कि देशभक्ति का मतलब व्यक्ति भक्ति नहीं है। पुराने जो मामले थे, मेरा ख्याल है, उनका इशारा भाजपा की तरफ ही है। भाजपा हमेशा उनके ऊपर आक्रामक रही है, यह उनका अपना व्यक्तिगत दर्द और अनुभव है, जिसे उन्होंने जाहिर किया है।
उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में भारत अकेला पड़ गया है, ऐसी दुर्दशा भारत की पहले कभी नहीं हुई थी। अभी तक किसी भी देश के राष्ट्रपति या राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भारत के पक्ष में बयान नहीं दिया है। जब सीजफायर के बाद सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा हुआ है, तमाम समझौते साइन किए हैं और कतर भी, रूस ने तो 2.6 मिलियन डॉलर का रक्षा सौदा किया है। सीजफायर के बाद से दूसरे देश पाकिस्तान के साथ और मजबूती से खड़े हो गए हैं। भारत से जो प्रतिनिधिमंडल गए हैं, तो देखता हूं, कौन देश भारत के समर्थन में खड़े होते हैं, वही उपलब्धि मानी जाएगी।
उदित राज ने आगे कहा कि कांग्रेस का स्टैंड उस व्यक्ति से अलग है। सुब्रमण्यम स्वामी को क्यों नहीं कहते हैं, वह भारतीय जनता पार्टी के हैं। उन्होंने कहा कि 5 फाइटर जेट हमारे गिरा दिए गए, तब कोई नहीं कहेगा कि भारतीय जनता पार्टी के व्यक्ति पार्टी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन जब हमारे यहां होता है, तो वो कहते हैं कि कांग्रेस के अंदर अंदरूनी झगड़ा चल रहा है, मगर भाजपा में होता है, तो अंदरूनी झगड़ा नहीं माना जाता है।
सलमान खुर्शीद के जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द करने के समर्थन पर उदित राज ने कहा कि यह बात तो ठीक है, राहुल गांधी भी कहते हैं कि जो बूथ नहीं जितवा पाए, वह बड़े-बड़े नेता बने हैं। दो चीजें मैं बड़े स्पष्ट रूप से देखता हूं। जो भारतीय जनता पार्टी के फाउंडर मेंबर रहे हैं, जैसे शांता कुमार, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत कई नेता, उनको दरकिनार कर दिया गया है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। वहीं, कांग्रेस सरकार में जो 10 साल मंत्री रहे, जबकि फाउंडर मेंबर भी नहीं हैं, मगर सत्ता से बाहर होते ही पार्टी के खिलाफ बोलने लगते हैं। भाजपा में जिसने सबकुछ दिया है, वहां चुप बैठे हैं, भले ही पार्टी ने उन्हें अलग-थलग कर दिया है। कांग्रेस में उल्टा है, पार्टी ने जिसको सबकुछ दिया है, सत्ता से बाहर होते ही पार्टी के खिलाफ बोलने लगते हैं, यह हैरानी की बात है।
–आईएएनएस
एसके/एबीएम
सलमान खुर्शीद ने अपना व्यक्तिगत दर्द और अनुभव जाहिर किया है : उदित राज
कांग्रेस नेता उदित राज ने सोमवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के “क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है” वाले बयान पर कहा कि यह उनका अपना व्यक्तिगत दर्द और अनुभव है, जो उन्होंने जाहिर किया है। सलमान खुर्शीद इन दिनों पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद विरोधी भारत के रुख को उजागर करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कई देशों के दौरे पर हैं।
उदित राज ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उन्होंने जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है कि विदेश की धरती पर जब हम हैं और प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, तो वहां हमें एकता का परिचय देना चाहिए। मैं उस बात से सहमत हूं। दूसरी बात है कि मोदी भक्ति अलग है, राष्ट्रभक्ति अलग है। व्यक्ति भक्ति में हम यकीन नहीं करते हैं, व्यक्ति भक्ति की हम आलोचना करते हैं, बिना वजह व्यक्ति भक्ति से देश पर असर पड़ता है। मुझे लगता है कि बाटला हाउस के मामले में सलमान खुर्शीद को घेरा गया, जब उन्होंने इस पर किताब लिखी थी, उसमें एक शब्द “बोको हराम” का जिक्र किया था, उसके बाद उनका जीना हराम कर दिया था भाजपा ने। उनकी राष्ट्रीयता, देशभक्ति पर तमाम प्रश्न खड़े किए थे।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि उनका वही दर्द झलकता है कि यह जो देशहित में बोलना है, क्या कोई गलत बात है या अपना तजुर्बा वह बता रहे हैं कि किस तरह से उन्होंने जो सही काम किया था, उसके ऊपर भी उंगली उठाई गई थी और एक मतलब है कि देशभक्ति का मतलब व्यक्ति भक्ति नहीं है। पुराने जो मामले थे, मेरा ख्याल है, उनका इशारा भाजपा की तरफ ही है। भाजपा हमेशा उनके ऊपर आक्रामक रही है, यह उनका अपना व्यक्तिगत दर्द और अनुभव है, जिसे उन्होंने जाहिर किया है।
उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में भारत अकेला पड़ गया है, ऐसी दुर्दशा भारत की पहले कभी नहीं हुई थी। अभी तक किसी भी देश के राष्ट्रपति या राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भारत के पक्ष में बयान नहीं दिया है। जब सीजफायर के बाद सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा हुआ है, तमाम समझौते साइन किए हैं और कतर भी, रूस ने तो 2.6 मिलियन डॉलर का रक्षा सौदा किया है। सीजफायर के बाद से दूसरे देश पाकिस्तान के साथ और मजबूती से खड़े हो गए हैं। भारत से जो प्रतिनिधिमंडल गए हैं, तो देखता हूं, कौन देश भारत के समर्थन में खड़े होते हैं, वही उपलब्धि मानी जाएगी।
उदित राज ने आगे कहा कि कांग्रेस का स्टैंड उस व्यक्ति से अलग है। सुब्रमण्यम स्वामी को क्यों नहीं कहते हैं, वह भारतीय जनता पार्टी के हैं। उन्होंने कहा कि 5 फाइटर जेट हमारे गिरा दिए गए, तब कोई नहीं कहेगा कि भारतीय जनता पार्टी के व्यक्ति पार्टी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन जब हमारे यहां होता है, तो वो कहते हैं कि कांग्रेस के अंदर अंदरूनी झगड़ा चल रहा है, मगर भाजपा में होता है, तो अंदरूनी झगड़ा नहीं माना जाता है।
सलमान खुर्शीद के जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द करने के समर्थन पर उदित राज ने कहा कि यह बात तो ठीक है, राहुल गांधी भी कहते हैं कि जो बूथ नहीं जितवा पाए, वह बड़े-बड़े नेता बने हैं। दो चीजें मैं बड़े स्पष्ट रूप से देखता हूं। जो भारतीय जनता पार्टी के फाउंडर मेंबर रहे हैं, जैसे शांता कुमार, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत कई नेता, उनको दरकिनार कर दिया गया है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। वहीं, कांग्रेस सरकार में जो 10 साल मंत्री रहे, जबकि फाउंडर मेंबर भी नहीं हैं, मगर सत्ता से बाहर होते ही पार्टी के खिलाफ बोलने लगते हैं। भाजपा में जिसने सबकुछ दिया है, वहां चुप बैठे हैं, भले ही पार्टी ने उन्हें अलग-थलग कर दिया है। कांग्रेस में उल्टा है, पार्टी ने जिसको सबकुछ दिया है, सत्ता से बाहर होते ही पार्टी के खिलाफ बोलने लगते हैं, यह हैरानी की बात है।
–आईएएनएस
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