झारखंड में भ्रष्टाचार का जिन्न एक बार फिर से बाहर निकल आया है। राज्य के गठन के बाद से अब तक कई बड़े घोटाले सामने आए हैं, जिनमें अफसरशाही की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हाल ही में रांची के पूर्व डीसी रहे विनय कुमार चौबे को शराब घोटाले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसके साथ ही अब तक झारखंड में छह आईएएस अधिकारियों को अलग-अलग घोटालों के मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। खास बात यह है कि इनमें से चार अधिकारी रांची जिले के उपायुक्त रह चुके हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि राज्य की राजधानी में ही भ्रष्टाचार क्यों ज्यादा देखने को मिल रहा है।
इन गिरफ्तार अधिकारियों में पहला नाम सजल चक्रवर्ती का है, जिन्हें चारा घोटाले के मामले में जेल जाना पड़ा था। इसके बाद दवा घोटाले में डॉ. प्रदीप कुमार, जमीन फर्जीवाड़ा मामले में छवि रंजन और अब शराब घोटाले में विनय कुमार चौबे की गिरफ्तारी हुई है। खास बात यह है कि ये चारों अफसर रांची जिले के डीसी रह चुके हैं। इसके अलावा पूजा सिंघल और सियाराम प्रसाद सिन्हा जैसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जा चुके हैं, हालांकि वर्तमान में वे जमानत पर हैं। एसीबी ने जमीन घोटाले में एसएन वर्मा और सुधीर प्रसाद के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिल गई।
चारा घोटाले की बात करें तो इस बहुचर्चित मामले में रांची की सीबीआई कोर्ट ने पांच आईएएस अधिकारियों को दोषी करार देते हुए जेल भेजा था। इन अधिकारियों में सजल चक्रवर्ती के अलावा महेश प्रसाद, के अरुणगम, फूल चंद्र सिंह और बेक जुलियस शामिल हैं। यह घोटाला बिहार और झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलता है, जहां करोड़ों रुपये का घोटाला वर्षों तक बिना किसी रोक-टोक के चलता रहा। यह भी देखा गया है कि अफसरशाही और राजनीतिक गठजोड़ ने मिलकर इन घोटालों को अंजाम दिया।
इस पूरे मामले पर झारखंड भाजपा के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि शराब घोटाले की जांच केवल एसीबी तक सीमित न रखी जाए, बल्कि इसकी सीबीआई जांच करवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। मरांडी ने कहा कि उन्होंने पहले ही 2022 में राज्य सरकार को इस घोटाले की आशंका जताते हुए पत्र लिखा था। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर झारखंड में भी कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से यह घोटाला किया है और जब तक जांच एजेंसी का दायरा नहीं बढ़ाया जाता, तब तक पूरे घोटाले की परतें नहीं खुल पाएंगी।












