झारखंड की राजनीतिक धरती पर तिलकधारी प्रसाद सिंह का नाम एक जीवित किंवदंती की तरह गूंजता है—एक ऐसा नाम जो सत्ता की चकाचौंध से दूर रहकर भी जनसेवा, शिक्षा और सादगी से जनता के दिलों पर छा गया। हरियाडीह पंचायत के एक सामान्य मुखिया परिवार में जन्मे तिलकधारी प्रसाद सिंह ने रांची विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई कर शिक्षक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। लेकिन यह महज़ एक शुरुआत थी।

उन्होंने चकाई उच्च विद्यालय में पढ़ाया, फिर मुखिया, देवरी प्रखंड प्रमुख और गिरिडीह जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में जनसेवा का वह सिलसिला शुरू किया जो आज भी मिसाल बना हुआ है। उनके नेतृत्व में गिरिडीह जिला कांग्रेस कमेटी ने सिर्फ नई पहचान नहीं बनाई, बल्कि निचले तबके की आवाज़ को ऊपर तक पहुंचाया।

राजनीति से परे तिलकधारी प्रसाद सिंह ने सहकारिता और खनन क्षेत्रों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। वे बिहार राज्य सहकारी बैंक, सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक गिरिडीह, और हज़ारीबाग माइंस बोर्ड के निदेशक रहे। उनके अनुभव और दूरदृष्टि का असर इस बात से ज़ाहिर होता है कि वे दो बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने उत्तरी छोटानागपुर स्वायत्त विकास प्राधिकार के उपाध्यक्ष के रूप में भी क्षेत्रीय विकास की नई दिशा दी।

तिलकधारी प्रसाद सिंह का संघर्षमयी सफर यह साबित करता है कि अगर इरादे नेक हों और सोच साफ हो, तो सच्ची जनसेवा किसी भी पद या प्रचार की मोहताज नहीं होती। आज उनका हमारे बीच न होना एक अपूरणीय क्षति है। ABA News परिवार उनकी स्मृति को नमन करता है और उन्हें अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करता है।














