गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में जनवितरण प्रणाली की हालत बेहद चिंताजनक है। यहां डीलरों को खुद अपने निजी वाहनों से गोदाम से राशन लाना पड़ रहा है, क्योंकि DSD ठेकेदारों की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं है। हैरानी की बात ये है कि जिन वाहनों से राशन ढोया जा रहा है, उनमें न तो GPS लगा है, न ही जनवितरण प्रणाली का कोई बोर्ड, और कई गाड़ियों का बीमा व फिटनेस तक फेल हो चुका है। ऐसे में न सिर्फ राशन की कालाबाज़ारी आसान हो गई है, बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में मुआवज़ा भी मिलना मुश्किल है।

डीलर अपनी जेब से लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च उठा रहे हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही। गोदाम प्रभारी जहां ठेकेदार के अभाव का हवाला दे रहे हैं, वहीं जिला आपूर्ति पदाधिकारी का कहना है कि राशन DSD के माध्यम से ही जाना चाहिए—अगर निजी वाहन से राशन जा रहा है, तो इसकी जांच होगी। ऐसे विरोधाभासी बयान बताने को काफी हैं कि ज़मीनी हकीकत और सरकारी दावे किस कदर अलग हैं।












