सोचिए, एक ऐसा छात्र जो झारखंड के एक साधारण स्कूल से निकलकर देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में टॉपर्स की लिस्ट में शामिल हो जाए—क्या ये किसी फिल्म की कहानी लगती है? लेकिन ये हकीकत है! जेईई मेन 2025 के रिजल्ट में जब 24 छात्रों के नाम 100 पर्सेंटाइल की लिस्ट में शामिल हुए, तब झारखंड की मिट्टी से निकला आर्यन मिश्रा 99.99 पर्सेंटाइल के साथ राज्य टॉपर बनकर उभरा। यह कहानी सिर्फ अंकों की नहीं, बल्कि संकल्प, संघर्ष और सफलता की मिसाल है।
आर्यन मिश्रा, आर्यन पब्लिक स्कूल का छात्र है, जिसने JEE Main 2025 के दूसरे सेशन में 99.99 पर्सेंटाइल स्कोर करके झारखंड राज्य में पहला स्थान हासिल किया। फिजिक्स में 99.98 पर्सेंटाइल का असाधारण स्कोर पाने वाले आर्यन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, स्कूल के शिक्षकों और खासतौर पर डॉ. एससी पांडे सर को दिया, जिन्होंने हर मुश्किल सवाल को आसान बना दिया। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन, मेहनती फैकल्टी और लगातार टेस्ट प्रैक्टिस ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
इस बार JEE Main में 15 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी, जिनमें से 24 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किए हैं। इसमें 21 सामान्य, 1 ईडब्ल्यूएस, 1 ओबीसी और 1 एससी श्रेणी से हैं। दिल्ली से दक्ष और हर्ष झा, आंध्र प्रदेश से साई मनोग्ना गुथिकोंडा, गुजरात से शिवेन विकास तोषनीवाल और आदित प्रकाश भागड़े जैसे छात्र टॉप पर हैं। महाराष्ट्र के सानिध्य सर्राफ, कर्नाटक के कुशाग्र गुप्ता और पश्चिम बंगाल की देवदत्ता माझी ने भी देश को गौरवान्वित किया।
रांची और जमशेदपुर जैसे झारखंड के शहरों से भी इस बार छात्र शानदार प्रदर्शन के साथ उभरे हैं। जमशेदपुर के उज्ज्वल आदित्य को 390वीं, अभिनव क्षितिज को 557वीं और ध्रुव एच बदोदरिया को 951वीं रैंक मिली है। रांची में करीब 6,000 छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से कई ने प्रभावशाली स्कोर हासिल किए। ये आंकड़े न सिर्फ इन शहरों की प्रतिभा का प्रमाण हैं, बल्कि पूरे झारखंड के शैक्षणिक विकास की झलक भी देते हैं।
आर्यन मिश्रा की कहानी सिर्फ उनके लिए उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनके शब्दों में—“अगर सही दिशा में मेहनत की जाए और टेस्ट सीरीज व गाइडेंस का सही इस्तेमाल किया जाए, तो कोई भी छात्र सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है।” ये संदेश खासतौर पर उन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के छात्रों के लिए है, जो अब भी इस भ्रम में रहते हैं कि सफलता सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित है।












