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संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को लेकर गिरिडीह में भारत मुक्ति मोर्चा की रैली

भारत के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए तथा आरएसएस बीजेपी के लोगों के द्वारा षडयंत्र पूर्वक बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन रद्द किये जाने के विरोध में तथा ओबीसी की जाति आधारित जनगणना के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के संदर्भ में राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के तहत आज दिनांक 22 जनवरी 2026 को गिरिडीह जिला में भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के द्वारा रैली प्रदर्शन किया गया । भारत मुक्ति मोर्चा प्रदेश महासचिव महेंद्र रजक के नेतृत्व में महामहिम राष्ट्रपति तथा माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार और माननीय गृहमंत्री भारत सरकार को उपायुक्त गिरिडीह के माध्यम से ज्ञापन दिया गया। धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने किया । धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार ने किया । विदित हो कि भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम के आह्वान पर संवैधानिक मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का आह्वान किया गयाहै जिसमें सात जनवरी 2026 को 725 जिलों में ज्ञापन देना, 15 जनवरी 2026 को 725 जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन, 22 जनवरी 2026 को 725 जिला मुख्यालयों पर रैली प्रदर्शन और 22 फरवरी 2026 को संविधान पर हमला करने के विरोध में देश भर के लाखों लोगों के द्वारा आरएसएस के हेड क्वार्टर नागपुर पर राष्ट्रीय विशाल महा रैली करने का आह्वान किया गया है। मामले के पृष्ठभूमि यह है कि बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा का राष्ट्रीय अधिवेशन कटक उड़ीसा में आयोजित किया जाना था । जहां लाखों की संख्या में ओबीसी, एस सी, एसटी एवं माइनॉरिटी, एवं क्षत्रिय समाज के लोग पहुंचने वाले थे। यह अधिवेशन ओबीसी पिछड़ा वर्ग की जाति आधारित जनगणना एवं इवीएम मशीन में होने वाली गडबडी को उजागर करने के लिए समर्पित किया गया था। ओबीसी के साथ साथ सभी जातियों की जाति आधारित जनगणना करके उसकी संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व देकर ही देश में सच्चा लोकतंत्र स्थापित किया जा सकता है। ओबीसी की जागृति से आरएसएस बीजेपी घबराई हुई है। इसलिए वह नहीं चाहती है कि ओबीसी में जागृति हो। बीजेपी ओबीसी के नाम से वोट लेकर सत्ता में आती है मगर ओबीसी को उसका हक देना नहीं चाहती। इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था एवं अधिकारों का गलत रूप से प्रयोग करते हुए वहां की सरकार ने आरएसएस के इशारे पर परमिशन को रद्द करने का काम किया । संविधान के नियमों के तहत चुनी गयी सरकार संवैधानिक प्रदत्त अधिकारो के खिलाफ़ में काम किया है। भारत के संपूर्ण भारत में इसके प्रति आक्रोश है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ,शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता और संगठन बनाने का अधिकार और समानता का अधिकार का हनन है जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 14 का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है । भारत मुक्ति मोर्चा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा भाजपा के संविधान द्रोही राजनीति के विरोध में यह आंदोलन कर रहा है । हमारा जो डिमांड है वह ज्ञापन के माध्यम से हम सरकार को सौंप रहे हैं अगर सरकार इस पर कार्रवाई नहीं करती है ।तो आने वाले दिनों में संविधान के दायरे में रहकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दूसरे चरण राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन के कार्यक्रम में मुख्य रूप से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार, बहुजन मुक्ति पार्टी के जिला अध्यक्ष जय नारायण दास ,भारत मुक्ति मोर्चा के राजेश दास ,राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के मोहम्मद मंसूर अंसारी , दामोदर कुमार साहू, जगदीश राम,कार्तिक दास, घनश्याम दास, गाण्डेय विधान सभा प्रभारी मुख्तार अंसारी, दिनेश दास , सोशल मीडिया प्रभारी किशोरी रविदास, प्रचारक शक्ति पासवान, बहुजन क्रांति मोर्चा के अरविंद नागवंशी, सुनील कुमार दास, डॉ राजकुमार दास, घनश्याम दास, गुड्डू कुमार राम ,उमेश रजक, जितेंद्र साव, यूनुस परवेज, संतोष प्रसाद यादव ,राजेश यादव ,बी पी दीपक, मुख्तार आलम,मोहम्मद अनवर, संदीप कुमार दास चेतन पासवान, , सतीश कुमार ,रंजीत दास, शंकर पासवान, मिथुन पासवान, रामदेव रविदास, रामेश्वर रविदास, राजेन्द्र दास, राहुल कुमार गौतम, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा के अरविंद भेंगराज ,सुरेश दास, रीतलाल दास, अख्तर अंसारी, अनील दास, छोटू कुमार दास, बीरेन्द्र रजक, धनंजय कुमार दास,दीपक रविदास, सोनू कुमार, अयूब अंसारी, विकी दास, हेमंती देवी, सीमा देवी,सिकंदर रजक, अजय साव,गिरधारी पासवान, रंजित मिरधा, संतलाल कोरी, सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे।

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