गिरिडीह के स्टेशन रोड स्थित सुरो सुंदरी इंस्टीट्यूट अकादमी स्कूल परिसर में हर साल की तरह इस बार भी शारदीय नवरात्रि पर भव्य दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। 1942 में शुरू हुई यह पूजा आज अपने 73वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और अपनी ऐतिहासिक परंपरा तथा धार्मिक आस्था के लिए जानी जाती है। बंगाली रीति-रिवाजों से संपन्न होने वाली यह पूजा गिरिडीह ही नहीं, आसपास के इलाकों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुकी है।

पूजा पंडाल में महाअष्टमी और महानवमी पर धाक की गूंज से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है। खास परंपरा के तहत यहां भुवा, कोहड़ा और खीरा की बलि दी जाती है और समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। यह पूजा न सिर्फ धार्मिक उत्सव है बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है, जो हर साल हजारों लोगों को एक साथ जोड़ती है।












