गिरिडीह नगर भवन में सोमवार को समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के उन्मूलन, बाल विवाह की रोकथाम तथा महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा को लेकर एकदिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त रामनिवास यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया।

उन्होंने कहा कि परंपराएं तभी तक सम्मान योग्य हैं, जब तक वे मानव गरिमा की रक्षा करें। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह बाल विवाह है, जो कानूनन अपराध है।

गिरिडीह को बाल विवाह मुक्त जिला घोषित करने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता से काम करेगा।कार्यशाला में उपविकास आयुक्त ने बताया कि गिरिडीह जिले में बाल विवाह की दर 45.6 प्रतिशत है, जो राज्य औसत से अधिक है। अनुमंडल पदाधिकारी ने समाज की सक्रिय भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि बदलाव तभी संभव है, जब लोग स्वयं इसके खिलाफ आवाज उठाएं। इस दौरान विभिन्न सामाजिक योजनाओं और कुप्रथाओं पर आधारित फिल्में भी प्रदर्शित की गईं।













