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कौन हैं राहुल चंद्रवंशी? गिरफ्तारी की मांग को लेकर बिहार से देवघर पहुंचे BJP नेता, भाई की मौत पर झारखंड में उबाल

देवघर। बिहार भूमिहार एकता मंच के संस्थापक और भाजपा नेता आशुतोष कुमार के भाई आलोक की संदिग्ध मौत को लेकर झारखंड के देवघर में जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक बवाल मच गया है। इस मामले में झामुमो युवा मोर्चा के अध्यक्ष राहुल चंद्रवंशी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आशुतोष कुमार अपने हजारों समर्थकों के साथ बिहार से देवघर पहुंच गए हैं। देवघर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। आशुतोष कुमार और उनके समर्थक लगातार प्रशासन से राहुल चंद्रवंशी को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं, वहीं कानून-व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन हाई अलर्ट मोड पर है और शहर के संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मामले की जड़ 9 दिसंबर को देवघर में हुई एक घटना से जुड़ी है। उस दिन एक सड़क हादसे में आलोक की मौत होने की सूचना सामने आई थी। शुरुआती जांच में इसे सामान्य सड़क दुर्घटना बताया गया, लेकिन बाद में भाजपा नेता आशुतोष कुमार ने इस घटना को हत्या करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में झामुमो युवा मोर्चा के अध्यक्ष राहुल चंद्रवंशी की भूमिका संदिग्ध है और उनके भाई की साजिशन हत्या की गई है। इसके बाद यह मामला राजनीतिक रंग लेता चला गया और बिहार व झारखंड दोनों राज्यों में इसकी गूंज सुनाई देने लगी।

राहुल चंद्रवंशी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और झारखंड की राजनीति में एक प्रभावशाली युवा नेता के तौर पर उनकी पहचान है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक साजिश है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। वहीं भाजपा नेता आशुतोष कुमार का दावा है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं, जो इस मामले को केवल सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या साबित करते हैं। इसी दावे के आधार पर वे अपने समर्थकों के साथ देवघर पहुंचे हैं और जब तक गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देवघर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। फिलहाल मामला पुलिस जांच के अधीन है और प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है। देवघर में तनावपूर्ण माहौल के बीच आम लोग प्रशासन से शांति और निष्पक्ष जांच की उम्मीद कर रहे हैं।

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