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गिरिडीह में बन रहा ‘चारधाम तीर्थ क्षेत्र श्रीरामपुर’: एक ही छत के नीचे जगन्नाथपुरी से बद्रीनाथ तक के दर्शन!”

झारखंड के गिरिडीह जिले के श्रीरामपुर में धार्मिक इतिहास रचने जा रहा है। यहाँ लगभग सात एकड़ क्षेत्रफल में 108 मंदिरों और चारों धामों (जगन्नाथपुरी, द्वारकाधीश, रामेश्वरम् और बद्रीनारायण) की भव्य प्रतिकृतियाँ स्थापित की जा रही हैं। इस अद्भुत पहल को ‘चारधाम तीर्थ क्षेत्र सरोवर गादीश्रीरामपुर’ नाम दिया गया है। इस परिसर में एक ही छत के नीचे देश के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन संभव होगा। मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है, जहाँ अब तक कई स्तंभ और मूर्तियाँ स्थापित हो चुकी हैं। यह न केवल झारखंड बल्कि पूरे भारत के लिए आस्था, संस्कृति और एकता का केंद्र बनने जा रहा है।

इस भव्य प्रकल्प के प्रेरणास्रोत फ्री जयप्रकाश पांडेय जी हैं, जिनके परिवार ने इस सपने को साकार करने की ठानी है। उनके सुपुत्र विजय प्रकाश पांडेय और पोते त्रिलोकी नाथ पांडेय इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। बातचीत के दौरान त्रिलोकी नाथ पांडेय ने बताया कि यह विचार अचानक नहीं, बल्कि एक दिव्य प्रेरणा से उपजा। उनके बड़े भाई अमित कुमार पांडेय वृंदावन गए थे, जहाँ प्रेम मंदिर की भव्यता देखकर वे गहराई से प्रभावित हुए। उन्होंने पिता से कहा कि “पिताजी, हम जिस भूमि को किसी और कार्य के लिए रखे हैं, उस पर कुछ ऐसा बनाइए जो आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास बन जाए।” उसी क्षण परिवार ने ठान लिया कि इस भूमि पर ऐसा धाम बनेगा जो श्रद्धा और समर्पण की मिसाल होगा।

निर्माणाधीन मंदिर परिसर की भव्यता देखते ही बनती है। दक्षिण भारतीय शैली की नक्काशी, विशाल 16 पिलर वाले मंडप और प्रत्येक कोने में अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियाँ इसे अद्वितीय बनाती हैं। यहाँ न केवल चारों धाम — जगन्नाथपुरी, द्वारकाधीश, रामेश्वरम् और बद्रीनाथ — की झलक मिलेगी, बल्कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों की भी स्थापना की जाएगी। बीच में भगवान गणेश का भव्य मंदिर इस पूरे परिसर का केंद्र बिंदु होगा। परियोजना के तहत लगभग 108 मूर्तियाँ अलग-अलग देवताओं की स्थापित की जा रही हैं। हर मूर्ति की स्थापना के पीछे एक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को पूरे भारत की आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव एक ही स्थान पर मिलेगा।

गिरिडीह का श्रीरामपुर अब धार्मिक पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। मंदिर परिसर तैयार होने के बाद यहाँ हर दिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। चारधाम तीर्थ क्षेत्र श्रीरामपुर न केवल एक धार्मिक स्थल बनेगा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, कला और एकता का प्रतीक भी होगा। पांडेय परिवार का मानना है कि यह काम उनका निजी विजन नहीं, बल्कि भगवान की प्रेरणा है — “हम कुछ नहीं कर रहे, भगवान हमसे करवा रहे हैं।” आज गिरिडीह इस अनोखी सोच का साक्षी बन रहा है, जहाँ एक ही परिसर में आस्था, सौंदर्य और संस्कृति एक साथ आकार ले रहे हैं।

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