जमशेदपुर के मानगो बस स्टैंड से रोजाना सैकड़ों यात्री रांची, पटना, छपरा, कोलकाता, भुवनेश्वर और पुरी जैसे शहरों के लिए लग्जरी बसों से सफर करते हैं। इन बसों में आराम और एसी की सुविधाएं तो मौजूद हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। अधिकांश बसों में न तो अग्निशामक यंत्र लगे हैं, न ही आपातकालीन निकास का इंतजाम है। यह स्थिति किसी भी दुर्घटना की सूरत में यात्रियों की जान को गंभीर खतरे में डाल सकती है। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में लग्जरी बसों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन जमशेदपुर प्रशासन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं दिख रहा है। बस संचालक भी सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर मुनाफे के चक्कर में यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो जमशेदपुर में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मानगो बस स्टैंड से चलने वाली अधिकांश बसें तकनीकी जांच और नियमित सर्विसिंग से भी नहीं गुजरतीं, जिससे शॉर्ट सर्किट या ओवरहीटिंग जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। पिछले कुछ दिनों में आंध्र प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में हुई बस दुर्घटनाओं ने आग से होने वाले हादसों के खतरों को एक बार फिर उजागर किया है। बावजूद इसके, झारखंड परिवहन विभाग की नींद अब तक नहीं खुली है। यात्री संगठन और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बसों में अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं, और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि यात्रियों की जान को बचाया जा सके।












